महंगाई भत्ते का बकाया चुकाए बिना बड़े विज्ञापन अभियान नहीं चला सकेगी पंजाब सरकार: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

Amir Ahmad

3 Aug 2026 5:04 PM IST

  • महंगाई भत्ते का बकाया चुकाए बिना बड़े विज्ञापन अभियान नहीं चला सकेगी पंजाब सरकार: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की वह अपील खारिज की, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का भुगतान करने के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई।

    इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों का पूरा बकाया नहीं चुकाया जाता, तब तक वह बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों पर खर्च नहीं करेगी।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके सेवा संबंधी वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा,

    "जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों का समस्त बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक पंजाब सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया में बड़े स्तर पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्च नहीं करेगी। ऐसे खर्च कर्मचारियों के वैध बकाये का भुगतान रोकने का आधार नहीं बन सकते।"

    इससे पहले सिंगल बेंच ने कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही 18 फरवरी 2025 की राज्य सरकार की उस 'परिसमापन योजना' को भी रद्द किया था, जिसके तहत पेंशन के बकाये का भुगतान आयु के आधार पर चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान था। अदालत ने उस योजना को मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया था।

    अपील की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि जिस समय सिंगल बेंच ने आदेश पारित किया उस समय उसके पास केवल वैधानिक निकायों और निगमों से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार था, पूरे राज्य के सेवा संबंधी मामलों का नहीं। इसलिए वह आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किया गया और प्रारंभ से ही शून्य माना जाना चाहिए।

    एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों ने स्वयं अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया, इसलिए उनके संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

    वहीं, कर्मचारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय कौशल ने दलील दी कि अधिकार क्षेत्र को लेकर उठाई गई आपत्ति निराधार है, क्योंकि उस समय मामलों के आवंटन में आंशिक समानता थी। उन्होंने यह भी कहा कि PSPCL स्वयं स्वीकार कर चुका है कि वह राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करता है, इसलिए राज्य सरकार के खिलाफ निर्देश जारी करना पूरी तरह उचित था।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने PSPCL की अपील खारिज की और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान करने का सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि जब तक पूरा बकाया अदा नहीं किया जाता, तब तक पंजाब सरकार बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियानों पर सार्वजनिक धन खर्च नहीं करेगी।

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