RTI Act के तहत सीधे CCTV फुटेज नहीं मांग सकता आवेदक, शिकायत पर कोर्ट या आयोग करा सकता है सुरक्षित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
8 Sept 2026 12:44 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मांगा गया CCTV फुटेज यदि अधिनियम की धारा 8(1)(g) में दिए गए अपवाद के दायरे में आता है तो उसे सीधे RTI आवेदक को नहीं दिया जा सकता। हालांकि, आवेदक संबंधित अदालत या आयोग के समक्ष शिकायत कर सकता है, जहां जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का आदेश दिया जा सकता है।
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निस्तारण किया।
मामले में याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग लखनऊ के राज्य सूचना आयुक्त द्वारा 14 मई 2026 को पारित आदेश रद्द करने और अपनी RTI अर्जी में मांगी गई पूरी सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने RTI की धारा 20 के तहत संबंधित अधिकारी पर अधिकतम 25 हजार रुपये जुर्माना लगाने और धारा 19(8)(b) के तहत कथित मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने की भी मांग की।
राज्य सूचना आयोग की ओर से कहा गया कि मांगा गया CCTV फुटेज संवेदनशील सूचना है और RTI की धारा 8(1)(g) में दिए गए अपवाद के अंतर्गत आता है। हालांकि, यदि अदालत या आयोग निर्देश दे तो फुटेज उसके सामने पेश किया जा सकता है, लेकिन इसे सीधे RTI आवेदक को नहीं सौंपा जा सकता।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले का हवाला देते हुए कहा कि CCTV फुटेज को सुरक्षित रखना उसका अधिकार है। इस फैसले में पुलिस थानों में बल प्रयोग की शिकायतों के संदर्भ में अदालत या आयोग द्वारा CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसमें फुटेज को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया।
हाईकोर्ट ने संबंधित फैसले के प्रावधानों को देखने के बाद कहा कि अदालत या आयोग के पास CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का अधिकार है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि RTI आवेदक उसे सीधे हासिल कर सकता है।
कोर्ट ने कहा,
“याचिकाकर्ता ने अभी तक किसी अदालत या आयोग के समक्ष कोई शिकायत दाखिल नहीं की है और केवल CCTV फुटेज मांगा है। धारा 8(1)(g) के अपवाद के कारण यह फुटेज उसे सीधे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।”
अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता उचित मंच या अदालत के समक्ष शिकायत दाखिल करता है तो वह मंच शिकायत की जांच के लिए CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और वास्तविक फुटेज मंगाने का निर्देश दे सकता है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।


