आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से चरित्र प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
4 Aug 2026 4:38 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस प्रकाश पड़िया और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 323, 504 और 506 के तहत दर्ज मामले का लंबित होना अपने आप में चरित्र प्रमाण पत्र की मांग खारिज करने का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट ने कहा,
"हमारी राय में केवल IPC की धारा 323, 504 और 506 के तहत मामला लंबित होने के कारण चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।"
यह मामला जालौन के जिला मजिस्ट्रेट, उरई द्वारा याचिकाकर्ता के चरित्र प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज किए जाने से जुड़ा था। जिला मजिस्ट्रेट ने केस क्राइम संख्या 913/2018 में IPC की धारा 323, 504 और 506 के तहत आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर आवेदन अस्वीकार कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए मांग की थी कि आदेश रद्द किया जाए और उसके चरित्र प्रमाण पत्र के आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा अनिल कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में पहले ही यह तय किया जा चुका है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
उस मामले में भी IPC की धारा 323, 504 और 506 के तहत दर्ज मामले के कारण चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि आपराधिक मामले के लंबित रहने के दौरान ही आवेदन खारिज कर दिया गया, जबकि बाद में आपराधिक अदालत ने उसे बरी कर दिया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया, जिसमें दोषसिद्धि, बरी होने और आपराधिक मामलों के लंबित रहने के प्रभाव को स्पष्ट किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई नहीं थी और संबंधित कानूनी सिद्धांतों पर कोई विवाद नहीं है।
कोर्ट ने पाया कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र देने से इनकार करना उचित नहीं था। इसके बाद हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश रद्द किया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को निर्धारित प्रारूप में चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की।


