अविवाहित बहन भी किसान बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपये की हकदार, परिवार की सूची में नाम होना जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
27 Oct 2026 1:08 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी अविवाहित बहन को केवल इस आधार पर दुर्घटना मृत्यु बीमा की पांच लाख रुपये की राशि से वंचित नहीं किया जा सकता कि योजना के तहत परिवार के सदस्यों की सूची में बहन का उल्लेख नहीं है। यदि वह मृतक की कानूनी वारिस है, तो वह बीमा राशि पाने की हकदार हो सकती है।
जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत बीमित परिवार के सदस्यों की सूची और परिवार के मुखिया या कमाने वाले व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति अथवा कानूनी वारिस को बीमा राशि देने का प्रावधान अलग-अलग हैं। कानूनी वारिस की पात्रता को केवल परिवार के सदस्यों की सूची तक सीमित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा,
"अविवाहित बहन को केवल इस कारण व्यक्तिगत दुर्घटना मृत्यु लाभ प्राप्त करने से अयोग्य नहीं माना जा सकता कि उसे अलग से बीमित परिवार के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया।"
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के भाई की 18 मई 2019 को सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता ने बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद उसका भाई परिवार की कृषि भूमि पर खेती करता था और परिवार के मुखिया तथा कमाने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाता था। अविवाहित होने के कारण याचिकाकर्ता अपने भाई पर निर्भर थी।
भाई की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने बीमा राशि के लिए दावा किया, लेकिन ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने यह कहते हुए दावा खारिज किया कि योजना से संबंधित समझौता ज्ञापन में बहन को परिवार के सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया गया।
हालांकि, बस्ती की जिला समिति ने हरैया के उपजिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मृतक को परिवार का मुखिया माना और बीमा कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद कंपनी ने 16 अप्रैल 2021 को पत्र जारी कर अपना निर्णय बरकरार रखा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि पक्षकारों के अधिकार समझौता ज्ञापन और बीमा पॉलिसी के प्रावधानों से तय होंगे। चूंकि इनमें बहन को शामिल नहीं किया गया, इसलिए उसे बीमा राशि नहीं दी जा सकती। कंपनी ने यह भी कहा कि योजना का कल्याणकारी उद्देश्य ऐसे दावे के भुगतान के लिए बाध्य नहीं कर सकता, जो बीमा के दायरे में ही नहीं आता।
इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि योजना में परिवार के मुखिया या कमाने वाले व्यक्ति की दुर्घटना मृत्यु के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और दुर्घटना के बाद परिवार के सदस्यों को मिलने वाले चिकित्सा लाभ अलग-अलग रखे गए। मृत्यु के बाद बीमा राशि प्राप्त करने वाले नामित व्यक्ति या कानूनी वारिस का उल्लेख भी दावा प्रक्रिया में किया गया।
अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी की व्याख्या स्वीकार करने का अर्थ होगा कि समझौते में मौजूद 'नामित व्यक्ति या कानूनी वारिस' शब्दों में एक ऐसी शर्त जोड़ दी जाए, जो उसमें लिखी ही नहीं है। यानी कानूनी वारिस होने के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति का योजना के तहत बीमित परिवार का सदस्य होना भी अनिवार्य मान लिया जाए।
हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम श्रीमती उमा देवी एवं अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा संबंधी दायित्व अनुबंध की शर्तों से तय होते हैं। अनुबंध के शब्दों को उनका वास्तविक अर्थ देते हुए पढ़ा जाना चाहिए और उनमें ऐसी शर्तें नहीं जोड़ी जानी चाहिए, जो उसमें मौजूद नहीं हैं।
अदालत ने अन्य संबंधित फैसलों पर भी विचार किया और स्पष्ट किया कि उन मामलों में ऐसा कोई सिद्धांत स्थापित नहीं किया गया कि बहन कानूनी वारिस होने के बावजूद मृत्यु बीमा राशि प्राप्त नहीं कर सकती।
खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में किसी अन्य दावेदार ने बीमा राशि पर अपना दावा पेश नहीं किया और उत्तराधिकार के आधार पर कोई अलग विवाद भी सामने नहीं आया था। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा याचिकाकर्ता का दावा खारिज करना उचित नहीं था।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि योजना के तहत बीमित व्यक्ति की दुर्घटना में घायल होने या चिकित्सा उपचार का लाभ प्राप्त करने वाले परिवार के सदस्यों की श्रेणी का विस्तार कर दिया गया। फैसला केवल दुर्घटना में मृत्यु होने पर बीमा राशि प्राप्त करने के अधिकार से संबंधित है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की और बीमा कंपनी द्वारा 16 अप्रैल 2021 को जारी दावा खारिज करने का आदेश रद्द किया। अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को पांच लाख रुपये का भुगतान किया जाए।

