70% वसूली की अनिवार्य शर्त पूरी किए बिना वरिष्ठता के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
26 Oct 2026 12:57 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश कलेक्शन अमीन सेवा नियमावली, 1974 के तहत निर्धारित न्यूनतम 70 प्रतिशत वसूली का मानक पूरा नहीं करने वाला मौसमी संग्रह अमीन केवल वरिष्ठता के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि संतोषजनक कार्य सेवा नियमों के तहत पात्रता की अनिवार्य शर्त है और वरिष्ठता का लाभ केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिल सकता है, जो पहले पात्रता की शर्तें पूरी करते हों।
जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने कहा कि नियमावली के नियम 5 के तहत संतोषजनक कार्य करना नियमित नियुक्ति के लिए पात्रता का आधार है। वरिष्ठता पात्र अभ्यर्थियों के बीच प्राथमिकता तय कर सकती है, लेकिन वह किसी अभ्यर्थी को पात्र बनाने के लिए निर्धारित अनिवार्य शर्त को समाप्त नहीं कर सकती। यदि किसी मौसमी संग्रह अमीन की वसूली निर्धारित मानक से कम है तो वह वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के आधार पर नियमित नियुक्ति की मांग नहीं कर सकता।
उत्तर प्रदेश कलेक्शन अमीन सेवा नियमावली, 1974 के नियम 5 में वर्ष 1992 में संशोधन किया गया। इसके तहत संग्रह अमीन के 35 प्रतिशत पदों को ऐसे मौसमी संग्रह अमीनों में से चयन करके भरने का प्रावधान है, जिन्होंने कम से कम चार फसलों में संतोषजनक कार्य किया हो। संतोषजनक कार्य के लिए पिछले चार फसलों में निर्धारित मानक के कम से कम 70 प्रतिशत की वसूली और पूरे कार्यकाल के दौरान अच्छा आचरण आवश्यक है।
मामले में याचिकाकर्ता ने वर्ष 1993 से 1997 के बीच रायबरेली जिले में सात फसलों तक मौसमी संग्रह अमीन के रूप में काम किया। नियमित नियुक्ति के उसके दावे को रायबरेली के जिलाधिकारी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि प्रत्येक फसल में उसकी वसूली 70 प्रतिशत से कम रही थी।
इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसने प्रत्येक फसल में 75 प्रतिशत से अधिक वसूली की थी। उसने यह भी कहा कि वरिष्ठता सूची में उससे नीचे रखे गए तीन व्यक्तियों को दिसंबर 2005 में नियमित नियुक्ति दी गई, जबकि उसे इस लाभ से वंचित रखा गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अवधेश कुमार पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि नियमित नियुक्ति से इनकार करना मनमाना है और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन करता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से रिकॉर्ड पर रखे गए फसलवार मांग और वसूली के आंकड़ों का परीक्षण किया। इन आंकड़ों से पता चला कि याचिकाकर्ता किसी भी सात फसलों में 70 प्रतिशत वसूली का मानक हासिल नहीं कर पाया था। उसकी सर्वाधिक वसूली भी केवल 66.87 प्रतिशत थी। पिछले चार फसलों की कुल वसूली का औसत लगभग 43.54 प्रतिशत पाया गया।
अदालत ने अवधेश कुमार पांडेय मामले को मौजूदा मामले से अलग बताते हुए कहा कि उस मामले में संबंधित अभ्यर्थी ने तहसीलदार का ऐसा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें उसकी वसूली 70 प्रतिशत से अधिक दर्शाई गई और उस प्रमाणपत्र को चुनौती नहीं दी गई। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के पक्ष में ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं था, जिससे निर्धारित वसूली मानक पूरा होना साबित हो सके।
पीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता से कनिष्ठ व्यक्तियों को 70 प्रतिशत वसूली की अनिवार्य शर्त पूरी किए बिना नियमित नियुक्ति दी गई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को किसी ऐसे व्यक्ति को नियमित नियुक्ति देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, जो कानून के तहत निर्धारित पात्रता की शर्त पूरी नहीं करता। वरिष्ठता का लाभ याचिकाकर्ता को तभी मिल सकता था, जब वह पहले पात्र मौसमी संग्रह अमीनों की श्रेणी में आता।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और रायबरेली के जिलाधिकारी द्वारा 15 जुलाई 2006 को पारित आदेश बरकरार रखा।

