NEET-UG 2026 | चार मेडिकल कॉलेजों में राज्य सरकार का बढ़ाया गया आरक्षण प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
21 Sept 2026 12:26 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में SC उम्मीदवारों के लिए बढ़ाए गए आरक्षण पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का 1 सितंबर 2026 का आदेश प्रथमदृष्टया हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों और राज्य सरकार की अपनी ओर से दी गई प्रतिबद्धता के विपरीत है और यह अदालत की अवमानना के दायरे में आता है।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले अदालत के समक्ष आश्वासन दिया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम 2006 (SC/ST Act) के अनुसार ही लागू किया जाएगा।
मामला अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी 2026 के दाखिले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सामान्य और EWS श्रेणी के अभ्यर्थी हैं। प्रत्येक कॉलेज में MBBS की 85 सीटें हैं। राज्य सरकार के विवादित आदेश के तहत इनमें से 62 सीटें अनुसूचित जाति, 5 सीटें अनुसूचित जनजाति और 11 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गईं। इसके बाद केवल 7 सीटें अनारक्षित बचती हैं।
इससे पहले सबरा अहमद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में एकल जस्टिस ने इन मेडिकल कॉलेजों में 2006 के अधिनियम में निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण तय करने वाले पुराने सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ अपील में राज्य सरकार ने कानूनी निष्कर्षों का विरोध नहीं किया लेकिन उस समय चल रही दाखिला प्रक्रिया को सुरक्षित रखने की मांग की।
डिवीजन बेंच ने उस शैक्षणिक सत्र के दाखिलों को जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन राज्य सरकार के इस आश्वासन के आधार पर कि 2026-27 से आरक्षण 2006 के अधिनियम के अनुसार सख्ती से लागू किया जाएगा। इस अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब एकल जस्टिस और डिवीजन बेंच पहले ही कानून की स्थिति स्पष्ट कर चुके थे और पिछली बार केवल उस समय चल रही दाखिला प्रक्रिया को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया गया, तब अगले शैक्षणिक सत्र से 2006 के अधिनियम को लागू करने के स्पष्ट निर्देश और राज्य सरकार के आश्वासन के बावजूद इसके विपरीत नया आदेश जारी करने का कोई औचित्य नहीं था।
कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना विशेष घटक योजना के तहत हुई। कोर्ट के अनुसार पहले की कार्यवाही में यह तर्क पहले ही खारिज किया जा चुका है।
खंडपीठ ने सरकारी आदेश की धारा 6(क)(ii) पर रोक लगाते हुए कहा कि दाखिले 2006 के अधिनियम के अनुसार किए जा सकते हैं। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को दस दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि विवादित आदेश किन परिस्थितियों में जारी किया गया।
कोर्ट ने कहा कि हलफनामा मिलने के बाद अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।

