इलाहाबाद हाईकोट

पति की हत्या के आरोप में महिला को मिली जमानत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चों की परित्यक्त स्थिति का लिया संज्ञान
पति की हत्या के आरोप में महिला को मिली जमानत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चों की परित्यक्त स्थिति का लिया संज्ञान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला को जमानत दी, जिस पर अपनी मां और कथित प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या करने का आरोप है। कोर्ट ने महिला के नाबालिग बच्चों की परित्यक्त अवस्था को ध्यान में रखते हुए उसे जमानत दी।जस्टिस राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने आरोपिता खुशबू देवी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480 के तहत राहत देते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला के पति की मृत्यु हो चुकी है वह स्वयं जेल में है और परिवार में बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं...

एक वर्ष से अधिक अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक पर सहमत होना, अलगाव को निष्प्रभावी नहीं करता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक वर्ष से अधिक अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक पर सहमत होना, अलगाव को निष्प्रभावी नहीं करता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति-पत्नी एक वर्ष से अधिक समय तक अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक के लिए सहमत हुए हैं, अदालत पूर्व के अलगाव काल को नजरअंदाज नहीं कर सकती।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए सहमति बनने से पहले का अलगाव काल भी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी(1) के तहत गिना जाएगा।हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के अंतर्गत आपसी सहमति से तलाक का प्रावधान करती है। अधिनियम की उप-धारा (1) के अनुसार दोनों पक्ष मिलकर तलाक की याचिका दायर कर सकते हैं। यदि वे एक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति का आदेश खारिज किया, कहा- यह नियुक्ति अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन करती है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति का आदेश खारिज किया, कहा- यह नियुक्ति अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन करती है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह माना कि शिक्षकों की अनुकंपा नियुक्ति शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करती है। इससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने 04.09.2000 और 15.02.2013 के सरकारी आदेशों को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21-ए के विरुद्ध घोषित किया, जहां तक ​​वे अनुकंपा के आधार पर शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति से संबंधित हैं।न्यायालय ने आगे कहा कि ये सरकारी आदेश, जो शिक्षकों के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता...

किशोर का दर्जा पाने के लिए जन्मतिथि में हेरफेर किया जा रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेजे एक्ट की धारा 94 के तहत आपराधिक मामलों में सख्त आयु सत्यापन का आह्वान किया
'किशोर का दर्जा पाने के लिए जन्मतिथि में हेरफेर किया जा रहा है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेजे एक्ट की धारा 94 के तहत आपराधिक मामलों में सख्त आयु सत्यापन का आह्वान किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में पारित एक आदेश मे आपराधिक कार्यवाही में वादियों द्वारा अपनी जन्मतिथि में हेरफेर करके 'अनुकूल' कानूनी परिणाम प्राप्त करने, जैसे कि किशोर घोषित किए जाने, की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई।कड़े शब्दों में दिए गए आदेश में, न्यायालय ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के अनुसार उचित आयु सत्यापन करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ढिलाई की भी आलोचना की।इन टिप्पणियों के मद्देनजर, पीठ ने यूपी सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीलाम की गई संपत्ति को डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ता को अवैध रूप से लौटाने पर बैंक ऑफ बड़ौदा को फटकार लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीलाम की गई संपत्ति को डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ता को अवैध रूप से लौटाने पर बैंक ऑफ बड़ौदा को फटकार लगाई

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को मनमाना, सनकी और निरंकुश करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई, क्योंकि बैंक ने नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने और सफल बोलीदाता (नीलामी खरीदार) से बयाना राशि स्वीकार करने के बावजूद संपत्ति को मूल उधारकर्ता को वापस लौटा दिया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस डॉ. योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि बैंक की यह कार्रवाई अवैध और मनमानी है। इसके लिए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।अदालत ने बैंक को आदेश दिया कि वह नीलामी खरीदार को उसकी बयाना राशि पर 24%...

सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक करना उसे पोस्ट करने या शेयर करने के बराबर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक करना उसे पोस्ट करने या शेयर करने के बराबर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी पोस्ट को लाइक करना उसे पोस्ट या शेयर करने के बराबर नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 [इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए दंड] के तहत अपराध नहीं होगा।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि किसी पोस्ट या संदेश को तब प्रकाशित कहा जा सकता है, जब उसे पोस्ट किया जाता है। किसी पोस्ट या मैसेज को तब प्रसारित कहा जा सकता है जब उसे शेयर या रीट्वीट किया जाता है।न्यायालय ने यह भी कहा कि IT...

UP Revenue Code | सह-भूमिधर संयुक्त स्वामित्व के कानूनी बंटवारे के बाद ही अपने हिस्से के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की मांग कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
UP Revenue Code | सह-भूमिधर संयुक्त स्वामित्व के कानूनी बंटवारे के बाद ही अपने हिस्से के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की मांग कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80(1) या 80(2) के तहत गैर-कृषि भूमि उपयोग घोषणा का यह अर्थ नहीं है कि भूमि का सह-भूमिधरों के बीच बंटवारा हो चुका है।अधिनियम की धारा 80 (4) की व्याख्या करते हुए जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव और जस्टिस शेखर बी. सराफ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अगर सह-भूमिधरों में से कोई एक संयुक्त स्वामित्व वाली भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए आवेदन करना चाहता है तो या तो सभी सह-भूमिधरों को एक साथ आवेदन करना होगा, या अगर...

हाईकोर्ट ने केवल इलाहाबाद और लखनऊ में हलफनामे की शपथ की वैधता पर उठाए सवाल; फोटो पहचान के शुल्क पर भी जताई आपत्ति
हाईकोर्ट ने केवल इलाहाबाद और लखनऊ में हलफनामे की शपथ की वैधता पर उठाए सवाल; फोटो पहचान के शुल्क पर भी जताई आपत्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस प्रचलन पर सवाल उठाए, जिसके अनुसार रिट याचिकाओं, अपीलों, पुनर्विचार आदि की दाखिलगी के लिए हलफनामों की शपथ केवल इलाहाबाद या लखनऊ में ही ली जा सकती है और यह क्षेत्राधिकार पर निर्भर करता है।कोर्ट ने यह भी प्रश्न उठाया कि इलाहाबाद और लखनऊ में स्थित फोटो एफिडेविट केंद्रों पर फोटो पहचान के लिए वसूले जा रहे शुल्क का क्या आधार है।याचिकाकर्ता के वकील ने पूरक हलफनामा दाखिल करने के लिए स्थगन की मांग की थी, क्योंकि हलफनामा देने वाला व्यक्ति लखनऊ जाकर फोटो पहचान और शपथ ग्रहण नहीं कर...

आर्य समाज मंदिरों में वैदिक या अन्य हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न विवाह Hindu Marriage Act के तहत वैध : इलाहाबाद हाईकोर्ट
आर्य समाज मंदिरों में वैदिक या अन्य हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न विवाह Hindu Marriage Act के तहत वैध : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में माना कि आर्य समाज मंदिरों में दो हिंदुओं (पुरुष और महिला) के बीच किए गए विवाह भी हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act), 1955 की धारा 7 के तहत वैध हैं, यदि वे वैदिक या अन्य प्रासंगिक हिंदू रीति-रिवाजों और समारोहों के अनुसार संपन्न किए गए हों और विवाह स्थल, चाहे वह मंदिर हो, घर हो या खुली जगह हो, ऐसे उद्देश्य के लिए अप्रासंगिक है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा कि आर्य समाज मंदिर में विवाह वैदिक प्रक्रिया के अनुसार किए जाते हैं, जिसमें...

असफल अंतरंग संबंधों के लिए कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में जमानत दी
'असफल अंतरंग संबंधों के लिए कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह 25 वर्षीय महिला द्वारा बलात्कार के आरोपी 42 वर्षीय व्यक्ति को यह देखते हुए जमानत दी कि FIR उनके असफल रिश्ते के 'भावनात्मक परिणाम' से अधिक उत्पन्न हुई प्रतीत होती है, न कि आपराधिक गलत काम की किसी वास्तविक शिकायत से।न्यायालय ने देखा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदक और पीड़िता के बीच संबंध खराब होने के बाद FIR दर्ज की गई और शिकायत के समय और परिस्थितियों से न्याय की 'वास्तविक' खोज के बजाय 'प्रतिशोधात्मक उद्देश्य' का पता चलता है।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने आगे कहा कि...

Arbitration Act | समय के भीतर धारा 34 के तहत अपील दायर करने पर अवार्ड पर कोई स्वतः रोक नहीं लगती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Arbitration Act | समय के भीतर धारा 34 के तहत अपील दायर करने पर अवार्ड पर कोई स्वतः रोक नहीं लगती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बनाम कोच्चि क्रिकेट प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य तथा हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया है कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 2016 की धारा 34 के अंतर्गत अपील दायर करने मात्र से मध्यस्थता पुरस्कार के संचालन पर स्वतः रोक नहीं लग जाती है। मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 2016 की धारा 36, जिसे 2015 के संशोधन अधिनियम के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, पुरस्कारों के प्रवर्तन का...

भागे हुए जोड़े जीवन के लिए वास्तविक खतरे के बिना पुलिस सुरक्षा का अधिकार नहीं ले सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भागे हुए जोड़े जीवन के लिए वास्तविक खतरे के बिना पुलिस सुरक्षा का अधिकार नहीं ले सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जो जोड़े अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध अपनी मर्जी से शादी करते हैं, वे अधिकार के रूप में पुलिस सुरक्षा का दावा नहीं कर सकते, जब तक कि उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए वास्तविक खतरा न हो।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि एक योग्य मामले में न्यायालय जोड़े को सुरक्षा प्रदान कर सकता है, लेकिन किसी भी खतरे की आशंका के अभाव में ऐसे जोड़े को "एक-दूसरे का समर्थन करना और समाज का सामना करना सीखना चाहिए।"एकल न्यायाधीश ने यह टिप्पणी श्रेया...

मुद्दे को दबाने का प्रयास: प्रशासनिक जज के दौरे के दौरान वकील की घर में नजरबंदी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीसीपी को तलब किया
'मुद्दे को दबाने का प्रयास': प्रशासनिक जज के दौरे के दौरान वकील की 'घर में नजरबंदी' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीसीपी को तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक प्रशासनिक न्यायाधीश के आगरा दौरे के दौरान एक अधिवक्ता को कथित तौर पर "घर में नजरबंद" किए जाने पर एक बार फिर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को नियमित मामले के रूप में नहीं लिया जाएगा और वह इसके गुण-दोष पर विचार करेगा। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने कहा, "हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि तथ्यों को छिपाने और दबाने के किसी भी प्रयास की न तो सराहना की जाएगी और न ही इसकी अनुमति दी जाएगी। न्यायालय इस मुद्दे के गुण-दोष पर...

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक के परिजनों को अप्रत्याशित लाभ पहुंचाना नहीं, इसका उद्देश्य केवल रसोई की आग जलाए रखना है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक के परिजनों को अप्रत्याशित लाभ पहुंचाना नहीं, इसका उद्देश्य केवल रसोई की आग जलाए रखना है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले से निपटते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा आधार पर नियुक्तियों का उद्देश्य मृतक के परिजनों को अप्रत्याशित लाभ पहुंचाना नहीं है। नियोक्ता को केवल वित्तीय स्थिति का आकलन करना होता है, जिससे रसोई की आग जलती रहे।यह टिप्पणी जस्टिस अजय भनोट ने इस संदर्भ में की कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए वित्तीय स्थितियों को कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया लेकिन लागू कानून के आलोक में इसकी जांच की जानी चाहिए।न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुकंपा नियुक्ति देने में अति उदार...

एक बार जब ट्रायल शुरू हो जाए और कुछ गवाहों की गवाही हो जाए तो संवैधानिक न्यायालयों को जांच को पुनः खोलने या ट्रांसफर करने से बचना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक बार जब ट्रायल शुरू हो जाए और कुछ गवाहों की गवाही हो जाए तो संवैधानिक न्यायालयों को जांच को पुनः खोलने या ट्रांसफर करने से बचना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि जब एक बार किसी मामले की जांच पूरी हो जाए, आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाए और मुकदमे की सुनवाई शुरू हो जाए तो हाईकोर्ट को सामान्यतः जांच को दोबारा खोलने या किसी अन्य एजेंसी को ट्रांसफर करने से बचना चाहिए। इसके बजाय जहां आरोप पत्र दाखिल हुआ, उस मजिस्ट्रेट या जिस अदालत में मुकदमा चल रहा है उसे कानून के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा,"जहां जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, सामान्यतः हाईकोर्ट को जांच को फिर से नहीं खोलना...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित कानून के खिलाफ याचिका दायर करने वाले 6400 से ज्यादा याचिकाकर्ताओं पर 100-100 रुपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित कानून के खिलाफ याचिका दायर करने वाले 6400 से ज्यादा याचिकाकर्ताओं पर 100-100 रुपये का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6,400 से अधिक याचिकाकर्ताओं पर 100-100 रुपये का जुर्माना लगाया है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य बनाम शिव कुमार पाठक और अन्य (2018) के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।2017 में, शिव कुमार पाठक और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हालांकि अधिकारियों को सामान्य पाठ्यक्रम में 7 दिसंबर, 2012 के विज्ञापन के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दी गई होगी, हालांकि, चूंकि 66,655 शिक्षकों को इसके द्वारा पारित अंतरिम आदेश के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकील को सुनाई 6 महीने की जेल की सजा, बहस के दौरान जज को गुंडा कहने का है आरोप
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकील को सुनाई 6 महीने की जेल की सजा, बहस के दौरान जज को 'गुंडा 'कहने का है आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के वकील अशोक पांडे को 2021 में ओपन कोर्ट में हाईकोर्ट जजों के खिलाफ़ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और उन्हें 'गुंडा' कहने के लिए छह महीने के साधारण कारावास की सज़ा सुनाई।वकील पांडे को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने न्यायालय की आपराधिक अवमानना ​​करने का दोषी पाया, क्योंकि पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि पांडे के आचरण से पता चलता है कि वह न्यायिक प्रक्रिया के साथ "पूरी तरह से तिरस्कार" करते हैं और दंड से बचकर संस्था की गरिमा और अखंडता को कमज़ोर करते...