1984 कानपुर दंगों पर हाइकोर्ट सख्त: नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इनकार

Amir Ahmad

25 March 2026 1:37 PM IST

  • 1984 कानपुर दंगों पर हाइकोर्ट सख्त: नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इनकार

    इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 1984 के कानपुर सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला देते हुए आरोपियों की याचिकाएं खारिज की। साथ ही आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया। अदालत ने इन घटनाओं को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।

    जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की पीठ ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने कहा,

    “यह घटनाएं देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का हिस्सा थीं, जो एक तरह से नरसंहार जैसा था।”

    रिकॉर्ड न होने का तर्क खारिज

    आरोपियों ने दलील दी थी कि मूल दस्तावेज जैसे FIR, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने गवाहों के बयान में देरी और पहचान पर भी सवाल उठाए।

    हालांकि, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित कर चुका है और पुनः जांच के आदेश दिए गए, भले ही मूल रिकॉर्ड उपलब्ध न हों।

    सरकार का पक्ष स्वीकार

    राज्य की ओर से कहा गया कि उस समय जल्दबाजी में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। अदालत ने भी माना कि कई रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद गवाहों के स्पष्ट बयान और पुनर्निर्मित FIR के आधार पर मामला बनता है।

    अदालत ने पाया कि गवाहों ने आरोपियों की पहचान की है और घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया, जिससे प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

    देरी के आधार पर राहत नहीं

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामलों में केवल समय बीत जाने के आधार पर कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया।

    साथ ही एक आरोपी द्वारा उठाए गए अलिबी (घटना स्थल पर मौजूद न होने) के तर्क को अदालत ने ट्रायल के दौरान साबित करने योग्य बताया, न कि इस आधार पर मामला खत्म किया जा सकता है।

    अंततः हाइकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज की और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।

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