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बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी देने के बारे में हुआ संशोधन पिछले प्रभाव से लागू होगा या नहीं यह सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ करेगा तय

LiveLaw News Network
3 Dec 2018 5:28 PM GMT
बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी देने के बारे में हुआ संशोधन पिछले प्रभाव से लागू होगा या नहीं यह सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ करेगा तय
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सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 में हुए संशोधन एन इस बात पर ग़ौर करेगा की इन संशोधनों को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है या नहीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बारे में एक अपील का यह कहते हुए निस्तारन कर दिया कि और कहा कि इस अधिनियम में विरोधाभासी बातें कही गई हैं और इसलिए इसके ख़िलाफ़ अनुच्छेद 133(1)(a) और 134A के तहतअपील की जा सकती है।

प्रकाश बनाम पूलवती (2015) मामले में न्यायमूर्ति एआर दवे और एके गोयल की पीठ ने कहा था कि 9-9-2005 को  इस संशोधन के तहत यह अधिकार सिर्फ़ जीवित सहदायिकों की जीवित बेटियों को मिलेगा औरइससे कोई मतलब नहीं है कि इन बेटियों का जन्म कब हुआ। न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और एएम सप्रे की पीठ ने भी मंगम्मल बनाम टीबी राजू  (2018) मामले में इसे सही ठहराया

दनम्मा @ सुमन सुरपुर बनाम अमर (2018) मामले में भी एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि उस पिता जिसकी 2001 में मौत हो गई, को सम्पत्ति में जो हिस्सेदारी है उसमें उसकी दो बेटियों को भीहिस्सा मिलेगा।

“चूँकि इस मामले की सुनवाई बड़ी पीठ (तीन सदस्यीय) करेगी, हम इस मामले की अंतिम रूप से सुनवाई करेंगे”, न्यायमूर्ति एके सीकरी, अशोक भूषण और एमआर शाह की पीठ ने कहा और इस मामले की अगलीसुनवाई की तिथि 5 दिसम्बर निर्धारित कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रकाश बनाम फुलवती के मामले का हवाला देते हुए कहा था कि इस संशोधन से वादी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है क्योंकि उसके पिता की 11 दिसंबर 1999 को मौत हो गई। हालाँकि, कोर्ट नेमामले में आगे अपील की अनुमति दे दी।

 

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