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रिटायर होने से पहले न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने कहा, मौत की सजा पर फिर से विचार करने की जरूरत, दोषी की सजा उम्रकैज में बदली [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
2 Dec 2018 7:06 AM GMT
रिटायर होने से पहले न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने कहा, मौत की सजा पर फिर से विचार करने की जरूरत, दोषी की सजा उम्रकैज में बदली [निर्णय पढ़ें]
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गुरुवार को रिटायर होने से पूर्व सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में तीसरे जज न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने तीन हत्याओं के दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलते हुए कहा है कि अब वक्त आ गया है जब देश में मौत की सजा के प्रावधान पर फिर से विचार किया जाए। हालांकि पीठ में शामिल न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता का मानना है कि फांसी एक वैद्य सजा है और जब तक ये संविधान में है इस पर विचार करने की जरूरत नहीं है। 2:1  के बहुमत से ये फैसला आया है।

बुधवार को सुनाए गए फैसले में पीठ की अगवाई कर रहे न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने विधि आयोग की 262वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि फांसी की सजा देने से समाज में  अपराध  नहीं घटा है। फांसी की सजा के प्रावधान के बावजूद यह अपराधियों को हतोत्साहित करने में नाकाम रहा है।  न्यायमूर्ति जोसफ ने कहा कि आमतौर पर ट्रायल जनता की राय और सामूहिक मांग को ध्यान में रख कर होता है। जांच एजेंसियां अदालत पर दबाव बनाती हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि संविधान में मौत की सजा का प्रावधान है इसलिए मामला उस कैटेगरी में है या नहीं, ये देखने का दायित्व जज पर ही रहेगा।

 हालांकि पीठ के अन्य जजों ने इस पर भिन्न विचार दिए। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता का मानना है कि फांसी एक वैद्य सजा है। उन्होंने बचन सिंह मामले में

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ के  फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि फांसी की की सजा में सुधार को लेकर बहस की जरूरत नहीं है। दोनों ने कहा कि मौत की सजा तभी दी जा सकती है जब दोषी के सुधरने की कोई गुंजाइश ना हो। हालांकि वो सजा का उम्रकैद करने के फैसले में न्यायमूर्ति जोसफ के साथ रहे।

इसके साथ ही  सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में  तीन लोगों की हत्या करने वाले 45 वर्षीय छन्नू वर्मा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।

 दरअसल 19 अक्टूबर 2011 को 32 वर्षीया रत्ना बाई, उसके ससुर 56 वर्षीय आनंदराम साहू व सास 55 वर्षीया फिरंतिन बाई की चाकू से वार कर हत्या कर दी थी जबकि पूर्व जिला पंचायत सदस्य मीरा बंछोर, उसके पति छन्नूलाल बंछोर व गेंदलाल वर्मा पर जानलेवा हमला कर घायल कर दिया था।

ट्रायल कोर्ट ने केस को रेयरस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए मौत की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए छन्नू वर्मा की फांसी की सजा को सही माना था।  इस फैसले को छन्नू वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में  चुनौती दी थी।


 
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