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मुफ़्त सर्विस की सुविधा लेने में विलंब का मतलब यह नहीं है कि वाहन की वारंटी समाप्त कर दी जाए, एनसीडीआरसी ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को मुआवज़ा देने को कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
23 Nov 2018 2:40 PM GMT
मुफ़्त सर्विस की सुविधा लेने में विलंब का मतलब यह नहीं है कि वाहन की वारंटी समाप्त कर दी जाए, एनसीडीआरसी ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को मुआवज़ा देने को कहा [आर्डर पढ़े]
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अगर कोई वाहन मालिक मुफ़्त में मिलने वाले सर्विस की सुविधा लेने में विलम्ब करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने वाहन के बारे में लापरवाह है और इस वजह से इस वाहन की वारंटी को समाप्त नहीं किया जा सकता। फ़ोरम ने कहा कि इसके लिए वाहन निर्माता कम्पनी और उसका डीलर दोनों ही ज़िम्मेदार है और एनसीडीआरसी ने दोनों को वाहन मालिक को मुआवज़ा देने का आदेश दिया। वारंटी में रहने के बावजूद कंपनी के डीलर ने वाहन की सर्विसिंग और इसकी मरम्मत से इंकार कर दिया था।

एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य प्रेम नारायण ने राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश को संशोधित करते हुए यह कहा। राज्य आयोग ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को 41,568 रुपए मुआवज़ा देने को कहा था क्योंकि इन्होंने एक ग्राहक के ट्रक को वारंटी में होने के बावजूद उसकी मरम्मत नहीं की।

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के डीलर ने इस आदेश को चुनौती दी थी। राज्य आयोग ने टाटा मोटर्स को दायित्व से मुक्त कर दिया था।

यह मामला है एक व्यक्ति का जिसने एक ट्रक ख़रीदी जो की वारंटी के अधीन था। लेकिन याचिकाकर्ता ने इसकी मरम्मत करने से इंकार कर दिया जिसके बाद उसने उपभोक्ता अदालत की शरण ली।

टाटा मोटर्स ने में कहा कि वाहन के निर्माण में कोई गड़बड़ी नहीं है इसलिए उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। राज्य आयोग ने इसे मान लिया। पर एनसीडीआरसी के समक्ष याचिकाकर्ता ने कहा कि वह तो टाटा मोटर्स का महज़ एक एजेंट है और टाटा मोटर्स ने लिखित में कहा है कि वह इस मामले में वारंटी नहीं दे सकता क्योंकि वाहन के मालिक ने वाहन के रख रखाव में कुछ लापरवाही दिखाई है।

यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता ने तीन मुफ़्त सर्विस का लाभ नहीं उठाया जिसकी वजह से इंजन में काफ़ी धूल जमा हो गया और इस वजह से वारंटी समाप्त हो गया और यह लागू नहीं हो सकता।डीलर का कहना था कि जब निर्माता वारंटी समाप्त कर चुका है तो वह इसकी मरम्मत कैसे कर सकता है।

इस मामले को लेकर प्रेम नाथ मोटर्स मिलिटेड बनाम अनुराग मित्तल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला भी दिया गया।यह कहा गया कि इस फ़ैसले के अनुसार राज्य आयोग ने वाहन निर्माता को देनदारी से मुक्त करके ग़लती की है।

दलीलों को सुनने के बाद एनसीडीआरसी  ने कहा कि मुफ़्त सर्विस का लाभ उठाने में देरी होने का मतलब यह नहीं है कि वाहन मालिक लापरवाह है और इस आधार पर उसकी वारंटी समाप्त कर दी जाए।

इसके बाद एनसीडीआरसी ने राज्य उपभोक्ता फ़ोरम के आदेश को संशोधित कर कहा कि इसके लिए वाहन निर्माता और डीलर दोनों ज़िम्मेदार हैं और दोनों को ही यह मुआवज़ा अदा करना होगा।


 
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