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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने से इनकार किया, ऑनलाइन बिक्री पर रोक, पटाखे चलाने का वक्त तय [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
24 Oct 2018 4:53 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने से इनकार किया, ऑनलाइन बिक्री पर रोक, पटाखे चलाने का वक्त तय [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश भर में दिवाली के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए पटाखों की बिक्री और पटाखे चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए कई दिशा निर्देश भी जारी किए हैं और पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है।

जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने ये फैसला सुनाते हुए केंद्र के हलफनामे को मंजूर करते हुए कहा है कि कम शोर और प्रदूषण वाले सुधार वाली क्वॉलिटी के पटाखों की बिक्री व निर्माण हो जिनमे राख और धूल  20 फीसदी तक कम हो। इनका मानक PESO की विशेषज्ञ टीम तय करेगी ताकि पटाखों में चारकोल और बारूदी रसायन की मात्रा को पैरोटेक्नीक से तय करने के बाद ही मंज़ूरी दी जाएगी। ग्रीन फायर क्रेकर्स का इस्तेमाल किया जाए जो कम धुआं दें। साथ ही कम धुंआ और आवाज वाले ऐसे पटाखे और आतिशबाज़ी जिनसे 30-35 फीसदी पीएम (पार्टिक्युलेट मैटर ) कम उत्सर्जित होता है। इनमें खतरनाक रसायन NOx और SO2 कम होता है।पीठ ने कहा कि दिल्ली और NCR में जो पटाखें बनाए जा चुके हैं और शर्तों के मुताबिक नहीं हैं उन्हें बेचने की इजाजत नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी हमने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक पर विचार नहीं किया है और इसके लिए व्यापक रिसर्च और शोध का इंतजार है। जब ये रिपोर्ट आ जाएंगी तो और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। अगली सुनवाई 11 दिसंबर को तय की गई है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली, अन्य त्योहारों व शादियों के लिए देशभर में रात को 8-10 तक ही पटाखे चलाने का निर्देश दिया है। हालांकि क्रिसमिस और नए साल पर 11.55 से 12.30 तक ही पटाखे चलाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि  जहां तक संभव हो दिल्ली NCR में सामुदायिक तौर पर पटाखे चलाए जाएं और सीपीसीबी एक हफ्ते में इलाकों की पहचान करेगा।सिर्फ लाइसेंस वाले ही पटाखे बेचे सकेंगे। ऑनलाइन पटाखें की बिक्री पर रोक है और ये अवमानना का मामला होगा। पीठ ने कहा है कि अगर कहीं भी आदेशों का उल्लंघन होता है तो इसके के SHO पर अवमानना का मामला चल सकता है और वो निजी तौर पर जिम्मेदार होगा।

28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, तमिलनाडु सरकार, पटाखा निर्माताओं औरयाचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

वहीं 22 अगस्त को याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी जा सकती है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने जस्टिस ए के बेंच सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ के समक्ष इस संबंध दलीलें पेश की थीं। दरअसल ये पीठ देशभर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की याचिकाओं की सुनवाई कर रही हैक्योंकि वे वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के परामर्श से दायर केंद्र के हलफनामे को अदालत में पेश किया था। इसके तहत केंद्र ने कम उत्सर्जन पटाखों के उपयोग का सुझाव दिया जिनमें 15 से 20 प्रतिशत तक राख के कण कम हों।

यह कहा गया कि PESO यह सुनिश्चित करेगा कि केवल उन पटाखों जिनके डेसिबल स्तर सीमा के भीतर हैं, बाजार में बेचने की अनुमति हो और उल्लंघन होने पर निर्माताओं के लाइसेंस को निलंबित करके कार्रवाई की जाए।

इसमें यह कहा गया है कि जुड़े हुए यानी सीरीज पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है क्योंकि इनसे भारी हवा, शोर और ठोस अपशिष्ट समस्याएं होती हैं।

प्रमुख भारतीय शहर कुछ देशों में अपनाए गए सख्त समय प्रतिबंध के साथ सामुदायिक पटाखे चलाने का विकल्प तलाश सकते हैं।

इसके साथ ही अन्य प्रतिबंधों का पता लगाया जा सकता है जैसे पटाखों की अनुमति केवल उन क्षेत्रों / फील्ड में ही दी जा सकती है जो पूर्व-पहचाने और संबंधित राज्य सरकार द्वारा पूर्व-निर्धारित किए गए हों।


 
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