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सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की वरिष्ठता निर्धारण के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने को कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
11 Sep 2018 9:46 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की वरिष्ठता निर्धारण के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने को कहा [आर्डर पढ़े]
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“…निचली अदालत में प्रैक्टिस करने वाला अधिवक्ता को भी वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया जा सकता है अगर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की राय में अधिवक्ता अधिनियम की धारा 16(2) के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करता है,याचिकाकर्ता ने कहा”

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अधिवक्ताओं को वरिष्ठ का दर्जा देने के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से मना कर दिया और अपीलकर्ता को इस बारे में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा।

यह याचिका अधिवक्ता देबाशीष रॉय ने दायर किया था और उन्होंने इसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देश के क्लॉज 11 और 14 को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, नवीन सिन्हा, और केएम जोसफ की पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक़, वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने के लिए सिर्फ हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं से आवेदन मांगना इंदिरा जयसिंह बनाम सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य मामले में दिए गए निर्देश के विपरीत है, पर इस और अन्य मुद्दों में गए बिना हमारा मानना है की अपीलकर्ता को हाईकोर्ट को न्यायिक मुद्दों को लेकर पहले हाईकोर्ट में जाना चाहिए। इसलिए हम, याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने को कहते हैं और उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने को कहते हैं। इस तरह इस याचिका को निपटा दिया जाता है।”

क्लॉज़ 11 के तहत वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा पाने के लिए सिर्फ वही आवेदन कर सकते हैं जो कलकत्ता हाईकोर्ट में नियमित रूप से प्रैक्टिस कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह क्लॉज़ हाईकोर्ट में जो नियमित रूप से प्रैक्टिस करता है उसमें और जो नियमित रूप से प्रैक्टिस नहीं करता है उनके बीच विभेद करता है।

जब निचली अदालत में प्रैक्टिस करने वाले किसी अधिवक्ता को हाईकोर्ट का जज नियुक्त किये जाने पर कोई रोक नहीं है, तो निचली अदालत में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने कल लिए आवेदन करने से अलग रखना न ही तर्कसंगत है और न इससे अधिवक्ता अधिनियम की धारा 16(2) के लक्ष्य पूरे होते हैं,” याचिकाकर्ता ने कहा।

इसी तरह, याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अधिनियम के क्लॉज़ 14 को भी चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने आवेदक-अधिवक्ता की पेशेवर आय जो की उसके पांच साल के आयकर रिटर्न से पता चलता है, के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के प्रावधान पर भी आपत्ति व्यक्त की है।


 
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