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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नहीं होंगे दोबारा चुनाव, ईमेल से नामांकन नहीं

LiveLaw News Network
24 Aug 2018 8:30 AM GMT
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नहीं होंगे दोबारा चुनाव, ईमेल से नामांकन नहीं
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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला आया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने राज्य चुनाव आयोग की अर्जी पर   कलकत्ता हाईकोर्ट के ईमेल से प्रत्याशियों नामांकन स्वीकार करने के आदेश को रद्द करते हुए साफ किया कि 20,159 सीटों पर जहां उम्मीदवार निर्विरोध जीते, दोबारा चुनाव नहीं होंगे। पीठ ने इन सीटों के नतीजे घोषित करने पर लगी रोक भी हटा ली।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ लोगों के ये आरोप काफी गंभीर हैं कि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया। ऐसे में पीड़ित लोग 30 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दाखिल कर सकते हैं। पीठ ने ये भी कहा कि ईमेल या वाट्सएप के जरिए नामांकन दाखिल नहीं किए जा सकते। इसका प्रावधान कानून में नहीं है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें राज्य चुनाव आयोग को पंचायत चुनावों के लिए ई-मेल के माध्यम से  नामांकन पत्र स्वीकार करने के लिए कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन उम्मीदवारों का चुमाव परिणाम घोषित ना करने का आदेश दिया था जो बिना विरोध जीत गए थे।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 58,692 में से 20,159 सीटों पर चुनाव लड़ा ही नहीं गया। इससे मालूम होता है कि लोकतंत्र निचले स्तर पर काम नहीं कर रहा है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि हाईकोर्ट का आदेश बुरा है। हाईकोर्ट कैसे जनप्रतिनिधि एक्ट में IT एक्ट के तहत आदेश दे सकता है।लेकिन निष्पक्ष चुनाव भी एक मुद्दा है। 34 फीसदी उम्मीदवारों का कोई विरोध नहीं हुआ और वो चुने गए ये परेशानी वाली बात है।

सुप्रीम कोर्ट ने CPIM , बीजेपी और कांग्रेस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

राज्य चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ईमेल से नामांकन दाखिल करने को कैसे कह सकता है ? हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया है। कि नामांकन पत्रों को स्वीकार किया जाए। ये आदेश सही नहीं है क्योंकि नामांकन में अफसर के सामने साइन करने होते हैं। कागजात की जांच की जाती है।

वहीं CPIM की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अशोक भान ने कहा कि हाईकोर्ट ने हालात को देखते हुए ये आदेश जारी किए हैं। पीठ को वहां के हालात समझने चाहिए। सत्ताधारी पार्टी के लोग दूसरी पार्टी के प्रत्याशियों को नामांकन तक दाखिल नहीं करने दे रहे।

वही बीजेपी की ओर से वरिष्ठ वकील पीएस पटवालिया ने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि करीब 22000 प्रत्याशियों यानी 34 फीसदी TMC प्रत्याशियों के खिलाफ कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ रहा है।

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