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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या सरकार आरोपी के फरार होने की स्थिति में उस पर मुकदमा चलाने के लिए नियम में संशोधन पर विचार कर रही है [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
16 May 2018 6:00 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या सरकार आरोपी के फरार होने की स्थिति में उस पर मुकदमा चलाने के लिए नियम में संशोधन पर विचार कर रही है [आर्डर पढ़े]
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एक या अधिक आरोपियों के फरार होने के कारण आपराधिक मुकदमे लंबे समय तक लंबित रहते हैं’

सुप्रीम कोर्ट ने क़ानून मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह उसे बताए कि फरार अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए वह बंगलादेश सरकार द्वारा सीआरपीसी 1898 की धारा 339-B में किए गए संशोधन के बारे में उसकी क्या राय है।

न्यायमूर्ति एके गोयल और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने एक आवेदन पर ज्यादा समय देने की अपील पर गौर करने के दौरान कहा कि निचली अदालत के पत्र में कहा गया है कि जब मामला गवाहियों के बयान दर्ज करने के स्तर पर था, आरोपी फरार हो गया और इस तरह सुनवाई में देरी हुई।

पीठ ने कहा, “हमने पाया है कि आपराधिक सुनवाई लंबे समय तक लंबित रहती है क्योंकि एक या एक से अधिक आरोपी फरार रहते हैं”।

इसके बाद उसने कहा कि हुसैन और अन्य बनाम भारत संघ मामले में कहा गया कि सीआरपीसी की धारा 339-B (जो कि बांग्लादेश पर लागू होता है) जिसमें आरोपी के सुनवाई के दौरान फरार होने पर उसकी अनुपस्थिति में उस पर मुकदमा चलाने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है, पर गौर किया जाए।

हुसैन के मामले में कोर्ट ने कहा था -

“इस मामले की सुनवाई के दौरान सुझाव दिया गया कि एक या एक से अधिक आरोपियों के फरार हो जाने के कारण मुकदमों की सुनवाई में होने वाली देरी को समाप्त किया जाए। इस बारे में बांग्लादेश के सीआरपीसी 1898 की धारा 339B में किए गए संशोधन की ओर हमारा ध्यान खींचा गया। इस संशोधन के अनुसार,कोर्ट यह समझ रहा है कि कोई आरोपी जब छिप जाता है या फरार हो जाता है तो ऐसा वह गिरफ्तारी और ट्रायल से बचने के लिए करता है और उसको गिरफ्तार किये जाने और ट्रायल के लिए कोर्ट के समक्ष पेश किये जाने की तत्काल कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने इस अपराध का संज्ञान लेते हुए ज्यादा प्रसार संख्या वाले दो बांग्ला अखबारों में इश्तहार देकर इस व्यक्ति को कोर्ट के समक्ष एक निर्धारित अवधि में पेश होने को कहा जाता है और अगर यह व्यक्ति ऐसा नहीं करता तो उसकी अनुपस्थिति में उस पर मुकदमा चलाया जाता है”।

कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त संशोधनों पर गौर करना संबंधित अथॉरिटी का काम है जो कि आरोपियों के फरार होने के कारण ऐसे मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी को कम कर सकता है।

इस मामले पर अब 3 जुलाई को सुनवाई होगी।


 
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