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गुरमीत राम रहीम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, ड्राइवर खट्टा सिंह की फिर से होगी दोहरे हत्याकांड में गवाही

LiveLaw News Network
5 May 2018 2:56 PM GMT
गुरमीत राम रहीम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, ड्राइवर खट्टा सिंह की फिर से होगी दोहरे हत्याकांड में गवाही
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दो साध्वियों से रेप के मामले में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह की ट्रायल कोर्ट में फिर से गवाही की इजाजत दी थी।

डेरा प्रमुख ने अपने पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह की अपील पर फिर से गवाही शुरू करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी।

दरअसल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहरे हत्याकांड मामले में खट्टा सिंह की गवाही को लेकर आदेश दिया था कि दोनों ही मामलों में राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह की फिर से गवाही होगी।

खट्टा सिंह ने सीबीआई कोर्ट में एक बार फिर से गवाही देने की याचिका लगाई थी जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई कोर्ट के फैसले को खट्टा सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। खट्टा सिंह का कहना है कि राम रहीम के दबाव की वजह से खुलकर गवाही नहीं दे सका था लेकिन अब राम रहीम जेल में बंद है तो वह फिर से गवाही देना चाहता है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि दोनों ही मामलों में राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह की फिर से गवाही होगी।

गौरतलब है कि दस जुलाई 2002 को डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत की हत्या हुई थी। आरोप है कि डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम खत अपनी बहन से ही लिखवाया था।

पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

वहीं रामचंद्र छत्रपति अपने अखबार ‘पूरा सच’ में अक्सर डेरा सच्चा सौदा में हो रहे अन्याय और अत्याचार के बारे में लिखा करते थे। इस अखबार ने ही साध्वी का वो खत छापा था जिसमें सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में महिलाओं के यौन उत्पीड़न की बात लिखी गई थी। उन्हें 24 अक्तूबर 2002 में गोली मार दी गई। हत्या के पीछे गुरमीत राम रहीम का नाम बताया गया। रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलियां मारी गई थी, जिसके बाद 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

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