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फैमिली कोर्ट के हाई कोर्ट के अधीन होने के अपने ही फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी चुनौती; सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
5 May 2018 2:46 PM GMT
फैमिली कोर्ट के हाई कोर्ट के अधीन होने के अपने ही फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी चुनौती; सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अपने ही एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर नोटिस जारी किया। अपने इस फैसले में हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट की देखरेख का जिम्मा हाई कोर्ट के पास होने की बात कही थी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और आर बनुमथी की पीठ ने गत वर्ष जुलाई में दिए गए एक फैसले को चुनौती संबंधी याचिका पर यह नोटिस जारी किया।

यूपी न्यायिक सेवा संघ ने दो परस्पर विरोधी प्रावधानों – उत्तर प्रदेश फैमिली कोर्ट नियम, 1995 के नियम 36 और उत्तर प्रदेश फैमिली कोर्ट्स (कोर्ट) नियम, 2006 के नियम 58 को चुनौती दी थी।

नियम 36 में कहा गया है कि फैमिली कोर्ट हाई कोर्ट की देखरेख में काम करेगा जबकि नियम 58 में कहा गया है कि फैमिली कोर्ट के जज जिला जज के प्रशासनिक और अनुशासनात्मक देखरेख में काम करेंगे और कुल मिलाकर हाई कोर्ट के नियंत्रण में होंगे।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया और कहा, “वैवाहिक विवादों से संबंधित मामले बहुत ही संवेदनशील होते हैं जिनको वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी की मदद से सुलझाने की जरूरत होती है। राज्य और हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के प्रधान जज की नियुक्ति प्रतिनियुक्ति द्वारा करने की नीति अपना रखी है। इस तरह, जिला जज के अधीन प्रधान जज के होने का फैमिली कोर्ट का पुराना तरीका चलने वाला नहीं है।”

इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 235 को देखते हुए नियम 58 में तबदीली करने की जरूरत है। इसी तरह 1995 नियम के नियम 36 को भी सुधारने की जरूरत है। कोर्ट ने इस मामले को हाई कोर्ट के प्रशासनिक विभाग को सौंपने का निर्देश दिया ताकि उसमें उपयुक्त संशोधन किया जा सके। इस फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।


 

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