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कठुआ रेप: आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, कहा सीबाआई जांच हो जिससे पीड़िता को न्याय मिले और असली अपराधी गिरफ्तार हों

LiveLaw News Network
5 May 2018 5:25 AM GMT
कठुआ रेप: आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, कहा सीबाआई जांच हो जिससे पीड़िता को न्याय मिले और असली अपराधी गिरफ्तार हों
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जम्मू और कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में आरोपी सांजीलाल और उसके बेटे विकास जगरोत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर मामले की जांच CBI को सौंपने का अनुरोध किया है।

सांजीलाल के बेटे लवली तोश के माध्यम से दाखिल इस हलफनामे में केस के ट्रायल को कठुआ से चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की पीड़िता के जैविक पिता की अर्जी का भी विरोध किया गया है।

शुक्रवार को दाखिल इस हलफनामे में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर  पुलिस की अपराध शाखा ने उन्हें केस में झूठा फंसाया है।असल अपराधियों को पकड़ने और पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए ये आवश्यक है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सिर्फ आशंका के आधार पर केस को जम्मू से बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।कठुआ में ट्रायल चल रहा है जिसमें  221 गवाह हैं जिनके लिए 265 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ जाकर गवाही देना मुमकिन नहीं। ये भी कहा गया है कि  धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश जहां कानून का शासन है वहां फ्री एंड फेयर  ट्रायल का अधिकार आरोपी का भी है।

आरोपियों के हलफनामे के मुताबिक पीड़ित परिवार को धमकी नहीं दी जा रही है बल्कि आरोपियों को खतरा है और इसके सबूत भी हैं।

आरोपियों ने कहा कि पीडिता की वकील दीपिका सिंह राजावत ट्रायल कोर्ट में पीड़ित परिवार की वकील नहीं हैं। वो हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में वकील हैं। जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट से साफ है कि उन्हें कोई धमकी नहीं दी गई। राजावत और उनके साथी तालिब हुसैन की सुरक्षा हटाई जानी चाहिए।

आरोपियों ने कहा है कि ट्रायल के अलावा जीने के अधिकार के तहत स्वतन्त्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच भी ज़रूरी है।

जम्मू कश्मीर पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है और ये भेदभाव और प्रेरित है। SIT के सदस्य DSP इरफान वानी के खिलाफ रेप का मुकदमा लंबित जबकि निरीक्षक निसार खान के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश का मुकदमा चल रहा है।

SIT ने केस डायरी में भी गड़बड़ की। साथ ही आरोपियों और तीन गवाहों को टॉर्चर कर जबरन बयान दर्ज कराए।

ये भी कहा गया है कि सांजीलाल 60 साल का है और वो पीड़ित बच्ची के दादा की उम्र की तरह है जबकि विशाल उस वक्त परीक्षा  दे रहा था।

आरोपियों ने कहा है कि वो खुद के लिए सही बर्ताव  और पीड़िता के लिए न्याय चाहते हैं।

दरअसल 27 अप्रैल को पीड़िता के जैविक पिता की ट्रायल को कठुआ से चंडीगढ ट्रांसफर करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ ट्रायल पर रोक लगा दी थी और आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। मामले की सुनवाई सात मई को होनी है।

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