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सुप्रीम कोर्ट की वृहत्तर पीठ पंचाट की सुनवाई के स्थान और उसके आधार एवं सिद्धांत के बारे में निर्णय करेगी [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
2 May 2018 4:02 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट की वृहत्तर पीठ पंचाट की सुनवाई के स्थान और उसके आधार एवं सिद्धांत के बारे में निर्णय करेगी [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ बनाम हार्डी एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन के मामले में इस प्रश्न का संदर्भ दिया कि जब किसी मध्यस्थता के समझौते में इस बात का जिक्र होता है कि मध्यस्थ ‘कहाँ’ बैठक करेंगे पर इस जगह का जिक्र नहीं होता है तो किस आधार पर और किस सिद्धांत के द्वारा पक्षकार इस जगह का चुनाव करते हैं क्योंकि फैसले के बाद मध्यस्थता की कार्यवाही इस बात पर निर्भर करेगी कि किसी विशेष देश का क़ानून वहाँ लागू होगा या नहीं।

क़ानून का यह प्रश्न उस समय पैदा हुआ जब दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई। इस आदेश में कहा गया था कि भारतीय अदालतों को अधिनियम की धारा 34 के तहत अपीलकर्ता के आवेदन पर गौर करने का अधिकार नहीं है जिसमें किसी अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक पंचाट की कार्यवाही द्वारा दिए गए निर्णय की वैधता पर प्रश्न उठाया गया है।

भारत के वकील और प्रतिवादी एएसजी तुषार मेहता और वरिष्ठ एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे पर अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के बारे में पीठ को बताया। सिंघवी ने पीठ को यह भी कहा कि यह प्रश्न कि यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल लॉ का प्रभाव क्या है उसका अभी तक पूर्व में लिए गए किसी भी फैसले में निर्णय नहीं हुआ है। ऐसा उस समय भी नहीं हुआ जब इस क़ानून को ‘जगह’ के बारे में निर्णय लेने के लिए मध्यस्थता के समझौते में शामिल किया जाता है।

न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ ने कहा, “हमारी राय में, यद्यपि मध्यस्थता बैठक की ‘जगह’ और ‘आयोजन स्थल’ के बारे में निर्णय लेने की इसलिए जरूरत पड़ती है क्योंकि मध्यस्थता समझौते की शर्तों में यह शामिल होता है, लेकिन इससे पहले इस कोर्ट द्वारा दिए गए विभिन्न फैसलों और वकीलों की दलीलों पर गौर करने के बाद और अपील के मुद्दे जो कि अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता में बार-बार उठते हैं, को ध्यान में रखते हुए हमारा मानना है कि हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 12 नियम, 2013 के अंतर्गत आदेश VI नियम 2 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं और इस मामले (अपील) को इस न्यायालय के वृहत्तर पीठ द्वारा सुनवाई का निर्देश दे सकते हैं।”


 
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