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DNA प्रोफाइल को लेकर मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

LiveLaw News Network
1 May 2018 4:08 PM GMT
DNA प्रोफाइल को लेकर मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
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मंगलवार को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वो संसद के मानसून सत्र में डीएनए प्रोफाइल पर एक विधेयक पेश करने का इरादा रखता है जो डीएनए प्रोफाइल का डेटाबेस बनाने में मदद करेगा और जिसका उपयोग  अज्ञात शवों की पहचान करने और गायब व्यक्तियों को खोजने में मदद करने के लिए किया जाएगा।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड की पीठ को यह जानकारी दी।

पीठ वे 2012 में गैर सरकारी संगठन लोकनीति फाउंडेशन द्वारा दायर पीआईएल की सुनवाई की जिसमें लापता बच्चों का पता लगाने और अज्ञात शवों का पता लगाने के लिए डीएनए प्रोफाइल बनाने का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। इस सबमिशन को रिकॉर्ड करने पर बेंच ने पीआईएल का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार लगभग 40,000 अज्ञात शवों को हर साल उनके हर निशान को मिटाने के लिए निपटाया जाता है। यह बताते हुए कि गायब व्यक्तियों और अज्ञात शवों के बीच एक मजबूत संबंध है, पीआईएल में निपटारे से पहले शरीर के डीएनए प्रोफाइल को रखने का सुझाव दिया। यह कहा गया है कि उन परिवारों को मौत की खबर देने में मदद मिल सकती है जो अपने करीबी और प्रियजनों के घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

 याचिकाकर्ता के वकील अशोक धमीजा ने कहा कि अज्ञात शव गंभीर अपराध के कारण हो सकते हैं और "चूंकि पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके शवों  की पहचान नहीं की जा सकती इसलिए संभव अपराध के अपराधी फरार रहते हैं और परिवार जिनसे पीड़ितों का संबंध था, कभी नहीं पता होता कि उनके नजदीकी और प्यारे लोगों का क्या हुआ। "

 फाउंडेशन ने कहा कि अज्ञात शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग लापता लोगों से मेल कराने में मदद कर सकती है। इसके अलावा  गायब व्यक्तियों की डीएनए प्रोफाइलिंग उन्हें ढूंढने में मदद कर सकती है और उन लोगों को मिला सकती है जो या तो गायब हो गए या बच्चों के रूप में अपहरण किया गया और वेश्यावृत्ति, बंधुआ श्रम या यहां तक ​​कि मानसिक रूप से अस्थिर हो गए हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि हालांकि सरकार 2007 से अज्ञात शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग के प्रस्ताव पर विचार कर रही है फिर भी कोई फैसला नहीं लिया गया।इसमें कहा गया कि  नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 2007 में 37,662, 37,668 (2008), 34,902 (2009), 33,857 (2010) और 37,193 (2011) अज्ञात शव बरामद किए गए थे।

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