Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

केंद्र ने कलकता हाई कोर्ट में 4 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की [अधिसूचना पढ़ें]

LiveLaw News Network
28 April 2018 3:39 PM GMT
केंद्र ने कलकता हाई कोर्ट में 4 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की [अधिसूचना पढ़ें]
x

कई विरोधों और विभिन्न अदालतों में कई आवेदनों के बाद केंद्र ने अंततः शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में चार अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया।

नियुक्त किए लोगों के नाम हैं :




  1. बिस्वजीत बासु

  2. अमृता सिन्हा

  3. अभिजित गंगोपाध्याय

  4. जय सेनगुप्ता


कलकत्ता हाई कोर्ट में बढ़ती रिक्तियों के खिलाफ गत वर्ष कई विरोध प्रदर्शन हुए। जुलाई 2017 में हाई कोर्ट ने केंद्र पर इस हाई कोर्ट के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया था और इससे पहले कि व्यवस्था दम तोड़ दे, उससे कार्रवाई करने को कहा था।

न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति देबी प्रोसाद डे की पीठ ने उस समय कहा था, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में जहाँ क़ानून के शासन की प्रमुखता है, न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मौलिक संरचना का हिस्सा है, जीवन का अधिकार और निजी स्वतंत्रता सबके लिए महत्त्वपूर्ण है और हाई कोर्ट का काम ठीक से चले यह संवैधानिक आवश्यकता है...सभी संबंधित साझीदारों का यह दायित्व है कि वे जजों के खाली पदों पर नियुक्ति शीघ्रता से करे ताकि लोगों का न्याय तक पहुँच संभव हो सके, एक हाई कोर्ट के प्रति सौतेला व्यवहार करके उसको अप्रभावी बना देने को नागरिक समाज पसंद नहीं करेगा।”

इस तरह की गंभीर स्थिति में पीठ को उम्मीद है कि जिनके हाथ में ताकत है वे अधिकारी इस कोर्ट के बारे में सोचेंगे और इसकी दशा सुधारने के लिए कदम उठाएंगे ताकि इस व्यवस्था को ढहने से रोका जा सके क्योंकि इस हाई कोर्ट के सात और जज नवंबर 2017 में और तीन और जज फरवरी 2018 में रिटायर होंगे।”

इसके बाद इस वर्ष फरवरी में कलकत्ता हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में नियुक्तियाँ नहीं होने के खिलाफ पांच दिनों तक काम नहीं करने की घोषणा की।

यूथ बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति शीघ्रता से की जाए और हड़ताल को समाप्त करवाने का आग्रह किया था।

हालांकि, इन चार जजों की नियुक्ति से बहुत ज्यादा राहत नहीं मिलने वाली है क्योंकि इस हाई कोर्ट में 50 फीसदी से अधिक सीट खाली है।


 
Next Story