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केंद्र ने न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पदोन्नति की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट को वापस किया [पत्र पढ़ें]

LiveLaw News Network
26 April 2018 2:57 PM GMT
केंद्र ने न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पदोन्नति की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट को वापस किया [पत्र पढ़ें]
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केंद्र का यह कदम न्यायपालिका से उसके रिश्ते को और बिगाड़ेगा। केंद्र ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नति देने के सुझाव को वापस सुप्रीम कोर्ट को लौटा दिया है। जोसफ के साथ-साथ वरिष्ठ एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को भी सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति देने का सुझाव दिया था जिसे अब केंद्र ने मान लिया है।

कॉलेजियम के सुझावों को रद्द करते हुए केंद्र ने कहा है कि अगर जोसफ को पदोन्नति दी गई तो अन्य हाई कोर्टों में उनके वरिष्ठ जजों के साथ न्याय नहीं होगा।

कॉलेजियम को लिखे अपने पत्र में केंद्र ने कहा है कि देश भर में हाई कोर्ट के जजों की वरिष्ठता सूची में जोसफ 42वें नंबर पर हैं और विभिन्न हाई कोर्ट के 11 मुख्य न्यायाधीश उससे वरिष्ठ हैं। इसके अलावा पत्र में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति और जनजाति का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

केंद्र ने आगे कहा है कि लगभग दस हाई कोर्टों का सुप्रीम कोर्ट में इस समय कोई प्रतिनिधित्व नहीं है और अगर जोसफ को पदोन्नति दी जाती है तो इसका अर्थ यह होगा कि केरल हाई कोर्ट के दो जज सुप्रीम कोर्ट में होंगे। केंद्र का यह भी कहना है कि केरल हाई कोर्ट में भी केरल का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है और दो जज टीबी राधाकृष्णन (छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट) और अंटोनी डोमिनिक (केरल हाई कोर्ट) के मुख्य न्यायाधीश हैं जो कि एक ही हाई कोर्ट के हैं।

केंद्र ने कहा है, “...जहाँ तक हमारे रिकॉर्ड की बात है, यह स्पष्ट है कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठता को महत्वपूर्ण आधार नहीं माना जा सकता। पर जहाँ एक हाई कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व पहले ही मिला हुआ है, तो फिर इस आधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

केंद्र ने पदोन्नति के प्रस्ताव को अलग-अलग करने को सही ठहराया है और कहा है कि इसीलिए वह इंदु मल्होत्रा के प्रस्ताव को मान रहा है जबकि जोसफ के प्रस्ताव को लौटा रहा है।

लम्बी प्रतीक्षा

न्यायमूर्ति जोसफ की नियुक्ति का मामला अभी कुछ समय से लटका हुआ था। जोसफ ने उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार कि बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार देते हुए इसे बहाल करने का आदेश दिया था। कॉलेजियम ने उस समय मई 2016 में उनको उत्तराखंड हाई कोर्ट से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना हाई कोर्ट ट्रांसफर करने का आदेश दिया था पर ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद गत वर्ष फरवरी में न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने पदोन्नति की सूची में न्यायमूर्ति जोसफ का नाम नहीं होने पर सवाल उठाया था।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के लिए जोसफ के नाम की सिफारिश की। कॉलेजियम के अन्य सदस्य हैं न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ।

न्यायमूर्ति जोसफ के नाम की अनुशंसा भेजने के समय यह बताया गया था कि ऐसा करते हुए मुख्य न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता पर गौर किया गया है और उनकी योग्यता और ईमानदारी का भी।


 
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