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बेचने लायक खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावट खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
26 April 2018 12:39 PM GMT
बेचने लायक खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावट खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रशासन बनाम विद्या गुप्ता मामले में कहा है कि बेची जाने वाली खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावटयुक्त खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध है।

न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि कोर्ट को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत निदेशक के प्रमाणपत्र में जो बातें कही गई हैं सिर्फ उस पर गौर करना चाहिए। उसे सार्वजनिक विश्लेषक या निदेशक के बीच किसी अंतर पर गौर करने की ज़रूरत नहीं है।

दिल्ली प्रशासन द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह बात कही। प्रशासन ने मिलावटी घी रखने के दोषी एक विक्रेता को छोड़ दिए जाने के खिलाफ यह अपील की थी। सत्र न्यायालय द्वारा इस व्यक्ति को बरी किये जाने के फैसले को हाई कोर्ट ने भी दो आधार पर सही माना। पहला, घी का जो नमूना लिया गया वह खुद ही बिक्री के लिए नहीं था बल्कि उसे मिठाई बनाने के लिए प्रयोग किया जाना था जिसे बाजार में बेचा जाता और इसलिए इसको लेकर कोई अपराध नहीं बनता। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जहाँ तक बीआर रीडिंग की बात है, सार्वजनिक विश्लेषक और निदेशक की रिपोर्ट में विसंगतियां थीं। हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक विश्लेषक ने बीआर रीडिंग को 52.7 बताया जबकि निदेश की रिपोर्ट में यह 53.1 था और इस तरह से 0.76% का अंतर था जो कि 0.3% से ज्यादा है और इसलिए नमूने को उस प्रकृति का नहीं माना जा सकता जैसा कि राज्य (दिल्ली प्रशासन) बी अनाम राम सिंह एवं अन्य में कहा गया है।

पीठ ने कहा कि खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की धारा 7 में स्पष्ट कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मिलावटी सामान रखता है और उससे कोई खाद्य सामग्री बनाता है जो बेचा जाएगा तो यह माना जाएगा कि वह मिलावटी सामान रखता है।

कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम बनाम लक्ष्मी नारायण टंडन मामले में दिए गए फैसले का उदाहरण देने की आरोपी की दलील को भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यह फैसला अधिनियम में संशोधन से पहले दिया गया था।

पीठ ने फैसले में कहा कि निदेशक की रिपोर्ट को पीए की रिपोर्ट पर तरजीह दी जाएगी और इस बारे में मिला प्रमाणपत्र अंतिम निर्णयात्मक रिपोर्ट होगी।

कोर्ट ने आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को निरस्त कर दिया और उसने जितना समय जेल में गुजारा है उतने ही समय की सजा उसे दी यह देखते हुए कि उसका व्यवसाय बंद हो चुका है और वह लगभग 70 साल का हो गया है।


 
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