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धांधली के आरोप के बीच चुनाव अधिकरण ने कर्नाटक बार काउंसिल के चुनावों को निरस्त किया, बीसीआई को 18 मई से पहले दुबारा चुनाव कराने को कहा

LiveLaw News Network
18 April 2018 10:08 AM GMT
धांधली के आरोप के बीच चुनाव अधिकरण ने कर्नाटक बार काउंसिल के चुनावों को निरस्त किया, बीसीआई को 18 मई से पहले दुबारा चुनाव कराने को कहा
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ट्रिब्यूनल ने पाया कि मतदान पेटियों को लाने ले जाने का कार्य निजी एजेंसी ने किया और इन्हें जिस कमरे में रखा गया था सील नहीं था

कर्नाटक राज्य बार काउंसिल के चुनाव को चुनाव अधिकरण ने निरस्त कर दिया है। अधिकरण को चुनाव में कई तरह की गड़बड़ियाँ मिली हैं और उसके विशेष समिति ने कहा है कि यह इस बारे में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के प्रस्तावों का उल्लंघन है। इस चुनाव को 15 मई से पहले दुबारा कराने को कहा गया है।

इस चुनाव को पूरी तरह निरस्त करने का निर्णय मंगलवार, 17 अप्रैल को लिया गया. अधिकरण की अगुवाई कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यामूर्ति एसके मुख़र्जी कर रहे हैं जिसमें शामिल हैं गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व जज आरडी व्यास, और पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज मृदुला मिश्रा।

चुनाव में हिस्सा लेने वाले एक उम्मीदवार एचआर दुर्गाप्रसाद को ईमेल द्वारा धांधली के बारे में शिकायत मिली। जहाँ मतदाताओं की सूची का चुनाव के पहले प्रकाशन नहीं हुआ था वहाँ मतदान में गड़बड़ी हुई, मतदाता पेटियों को ले जाने के लिए पुलिस की मदद नहीं ली गई और इसे ले जाने का काम निजी एजेंसी को दे दिया गया, इन पेटियों को ऐसे कमरे में रखा गया जो सील नहीं था और चुनावों की सीसीटीवी कैमरे से रिकॉर्डिंग भी नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि दिशानिर्देश के अनुसार, इस चुनाव का चुनाव अधिकारी हाई कोर्ट के किसी पूर्व जज को होना चाहिए था पर कर्नाटक बार काउंसिल के सचिव ने यह भूमिका निभाई।

अधिकरण ने कहा कि कर्नाटक राज्य बार काउंसिल का जिस तरह से चुनाव हुआ है वह इस और इशारा करता है कि स्थिति बहुत खराब है।

दुबारा चुनाव 18 मई को कराया जाए

 “हम, इसलिए कर्नाटक राज्य बार काउंसिल के इस पूरे चुनाव को निरस्त कर रहे हैं। बीसीआई द्वारा गठित समिति ताजा मतदान पत्र की प्रिंटिंग के बाद बीसीआई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार इसका दुबारा चुनाव कराएगा। अधिकरण ने कहा कि बीसीआई को चाहिए कि वह किसी पूर्व जज को चुनाव अधिकार नियुक्त करे और किसी अन्य राज्य के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को पर्यवेक्षक।

“काउंसिल कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह करे कि वह पुलिस को निर्देश दे कि चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षक के साथ वह सहयोग करे। बीसीआई 15 मई 2018 से पहले इस चुनाव को दुबारा कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए”।

यह बीसीआई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघ है

 “…एक पूर्व हाई कोर्ट जज को पर्यवेक्षक के रूप में शामिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव निष्पक्ष हो। कर्नाटक राज्य बार काउंसिल की विशेष समिति ने जो तरीका अपनाया है वह सकते में डालने वाला और बीसीआई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है”।

अधिकरण ने यह भी कहा कि चुनाव कराने वाले दल को कोई पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई। मतदान पेटियों को ले जाने के लिए कोई अधिकृत लोग नहीं थे।

कर्नाटक बार काउंसिल की विशेष समिति के वकील श्रीनिधि वी ने कहा कि पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी पर वे इसके समर्थन में किसी तरह का सबूत नहीं पेश कर पाए।

 अधिकरण ने कहा कि विशेष समिति को उस स्थिति में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शरण में जाना चाहिए था न कि किसी निजी एजेंसी को यह कार्य सौंपना चाहिए था।

शिकायतकर्ता की पैरवी करते हुए सौरभ अग्रवाल ने अधिकरण का ध्यान इस चुनाव के दौरान हुई कई गड़बड़ियों की ओर आकृष्ट किया और कहा कि मतदान पेटियों की ढुलाई का कार्य निजी एजेंसी को दिया गया और उन्हें ऐसे कमरे में रखा गया जो सील नहीं था और उस पर चुनाव अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं था।

कौन थे पर्यवेक्षक?

श्रीनिधि ने स्वीकार किया कि हर मतदान केंद्र पर मतदान की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई पर संवेदनशील मतदान केंद्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग हुई और सथानीय पर्यवेक्षकों से कहा गया कि वे उनके फोटोग्राफ भी लें।

इस पर अधिकरण की टिप्पणी थी, “स्थानीय पर्यवेक्षक से आपका क्या मतलब है, हम समझ नहीं पाए।”

  “...यह एक गंभीर चूक है। ये स्थानीय पर्यवेक्षक कौन थे और इनकी नियुक्ति कैसे हुई, इसके बारे में किसी को भी जानकारी नहीं है। सचिव (राज्य बार काउंसिल) ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, अधिकरण ने कहा।


 
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