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सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस में भर्ती के लिए सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा को समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
18 April 2018 4:58 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस में भर्ती के लिए सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा को समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा (एलसीई) को समाप्त करने के निर्णय को सही ठहराया है। सरकार ने कहा है कि ऐसा आम लोगों के हित में किया गया है।

चुनौती

वर्ष 2012 में यूपीएससी ने एलसीई के माध्यम से आईपीएस में भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे और लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए गए थे पर आज तक इस परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया गया। इस परीक्षा के लिए भारतीय पुलिस सेवा (भर्ती) संशोधित नियम, 2011 के द्वारा एलसीई शुरू की जो कि इस सेवा में होने वाली सामान्य भर्ती के अतिरिक्त था और विभिन्न हाई कोर्टों में इसको चुनौती दी गई। दिल्ली और गौहाटी हाई कोर्टों ने संशोधित नियमों को सही ठहराया।  भारत सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवा लिया।

इस वर्ष जनवरी में, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह एलसीई की परीक्षा को समाप्त कर रही है। एक छात्र ने इस परीक्षा का विरोध किया था जो एलसीई में बैठा था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इसके बाद यह निर्णय किया कि इसको समाप्त करना उचित है कि नहीं।

सरकार ने समाप्त करने के जो कारण दिए




  • रिक्तियों का प्रतिशत कम हो गया है

  • चयन में पांच साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है और इसके द्वारा चुने गए व्यक्ति की सेवा अवधि पांच साल कम हो जाएगी

  • बहुत सारी याचिकाएं अभी भी लंबित हैं और फैसला अभी नहीं आया है और इस स्थिति में इसमें और ज्यादा देरी हो सकती है

  • इस बात की आशंका है कि अगर उम्मीदवारों को इस माध्यम से नियुक्त किया गया तो उम्मीदवारों के बीच इसको लेकर मुकदमेबाजी हो सकती है।


इसको समाप्त करना जनहित में है

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी अधिकार के तरह यह दावा नहीं कर सकते कि इस परीक्षा का परिणाम घोषित ही किया जाए और उनकी नियुक्ति की जाए अगर उन्हें योग्य पाया जाता है।

कोर्ट ने केंद्र की इस दलील से सहमति जताई कि अगर इस परीक्षा के आधार पर नियुक्ति की गई तो इससे आगे चलकर वर्ष 2013 और 2018 के बीच नियुक्त किए गए लोगों में मुकद्दमे की बाढ़ आ जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्णय को समग्रता में देखने पर हमें इसमें कोई संदेह नहीं लगता कि एलसीई भर्ती व्यवस्था को जनहित में समाप्त किया जा रहा है। कोर्ट ने इस बारे में सभी याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि यह फैसला मनमाना है।


 
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