Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

हमें उम्मीद है सरकार जल्द से जल्द लोकपाल की नियुक्ति करेगी : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
17 April 2018 7:59 AM GMT
हमें उम्मीद है सरकार जल्द से जल्द लोकपाल की नियुक्ति करेगी : सुप्रीम कोर्ट
x

लोकपाल की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर बानुमति की पीठ ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस संबंध में कदम उठाएगी।

मंगलवार को इस संबंध में किसी भी तरह के आदेश जारी करने से इनकार करते हुए पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते का और वक्त दे दिया। इस दौरान केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इसके लिए  एक प्रतिष्ठित न्यायविद् के नाम पर विचार किया गया है और दस अप्रैल को ही बैठक हुई थी। ये बैठक आगे भी होगी।

वहीं याचिकाकर्ता कॉमन कॉज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार जानबूझकर लोकपाल की नियुक्ति में देरी कर रही है। ऐसे में कोर्ट को आदेश जारी करना चाहिए।

लेकिन कोर्ट ने फिलहाल कोई आदेश जारी करने से इंकार करते हुए मामले की सुनवाई 15 मई को तय की है। पीठ ने कहा कि सरकार से उम्मीद है कि वो जल्द ही लोकपाल की नियुक्ति करेगी।

6 मार्च को लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ये प्रक्रिया जारी है और इसमें कुछ वक्त लगेगा।  केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा था कि प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ), लोकसभा अध्यक्ष और विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के बीच एक मार्च को बैठक तय थी। लेकिन इसमें कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खडगे ने भाग नहीं लिया। इसके तहत पहले नामचीन हस्ती का चुनाव किया जाएगा और फिर लोकपाल के लिए नाम तय किए जाएंगे।

इस दौरान जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा था कि इस प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा तो AG ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द इसे पूरा करने की कोशिश कर रही है।

पहले सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2014 में देरी के बाद अब लोकपाल की नियुक्ति के लिए कदम उठाए गए हैं और 1 मार्च को चयन पैनल की एक बैठक आयोजित की जाएगी।

  केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ), लोकसभा अध्यक्ष और विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के बीच एक मार्च को बैठक तय है।

उन्होंने यह भी कहा कि चयन पैनल की बैठक में देरी वरिष्ठ वकील पीपी राव की मौत के कारण हुई जो पिछले साल सितंबर में पैनल में शामिल थे। सरकार के सबसे बडे कानून अधिकारी की दलीलों को स्वीकार करते हुए बेंच ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव को 5 मार्च तक इस संबंध में उठाए गए कदम के बारे में विस्तार से शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

एनजीओ कॉमन कॉज द्वारा दायर अवमानना याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही है।

लोकपाल अधिनियम के तहत, जिसे संसद में 2013 में पारित किया गया था, लेकिन अगले साल राष्ट्रपति द्वारा अपनी सहमति देने के बाद इसे प्रभावी किया गया।

 लोकपाल को चयन समिति द्वारा नियुक्त किया जाएगा जिसमें प्रधान मंत्री, सीजेआई या उनके नामांकित व्यक्ति और एक प्रतिष्ठित न्यायविद् शामिल हैं।

सरकार का रुख है कि विपक्ष के नेता (एलओपी) की अनुपस्थिति की वजह से देरी हुई।

चूंकि कांग्रेस के पास लोकसभा में  कुल सीटों की आवश्यक 10 प्रतिशत सीट नहीं हैं, इसलिए पार्टी को 2014 के आम चुनाव के बाद एलओपी की स्थिति से वंचित किया गया था।

 अप्रैल 2017 में शीर्ष अदालत ने कहा था कि भ्रष्टाचार विरोधी निकाय को बिना देरी के स्थापित किया जाना चाहिए और एलओपी की अनुपस्थिति को नियुक्ति के रास्ते में नहीं आना चाहिए। हालांकि बाद में सरकार ने लोकपाल के चयन पैनल और सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति पैनल में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को  शामिल करने का फैसला किया

Next Story