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वकीलों के खिलाफ बार काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई : कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना किया

LiveLaw News Network
7 April 2018 2:40 PM GMT
वकीलों के खिलाफ बार काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई : कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना किया
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“आपने जनहित याचिका क्यों दायर की”, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पूछा। मामला था एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई का जो कि 8 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें कर्नाटक राज्य बार काउंसिल द्वारा जारी की गई तीन सूचनाओं को चुनौती दी गई थी जिसमें पांच एड्वोकेटों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।

राज्य बार काउंसिल ने एक अधिसूचना जारी कर एक एडवोकेट को चेतावनी दी थी, दो को एक साल के लिए निलंबित कर दिया था और अनुशासनात्मक कार्रवाई के पूरी होने तक दो अन्य को निलंबित कर दिया था।

एडवोकेट एचआर विश्वनाथ (खुद एक पक्ष) ने उक्त रिट याचिका के समर्थन में अपनी पैरवी में कहा कि कर्नाटक राज्य बार काउंसिल का कार्यकाल 27 जनवरी 2017 को पूरा हो गया था और इसलिए एडवोकेट अधिनियम के तहत गठित विशेष समिति गैर कानूनी है। इस वजह से जो आलोच्य अधिसूचना जारी की गई वह भी गैर कानूनी हो जाता है।

इस याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “मुख्य मांग यह है कि बार काउंसिल द्वारा जारी अधिसूचना निरस्त कर दी जाए जो कि एड्वोकेटों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित है। इसलिए हमें इस याचिका में जनहित कहीं नहीं दिखाई देता। इस वजह से यह याचिका निरर्थक है ...”

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, डीवाई चन्द्रचूड़ और एएम खानविलकर की पीठ ने शुक्रवार को कहा, “हम हाई कोर्ट के आदेश में दखल नहीं देना चाहते...हालांकि, याचिकाकर्ता को यह छूट है कि वह क़ानून के अनुरूप अपनी शिकायत का निपटारा करवाए”।

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