काले हिरण का शिकार : सलमान ने कहा, जेल भेजा तो फिल्म जगत से जुड़े घरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा, कोर्ट ने कहा, किसी लाभ के हकदार नहीं सलमान

LiveLaw News Network

5 April 2018 4:19 PM GMT

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    1998 के काले हिरण के शिकार मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देव कुमार खत्री ने अभिनेता सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाए जाने पर 201 पन्नों का फैसला सुनाया है।

    इस फैसले में कहा गया है कि - अभियोजन सलमान खान के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में कामयाब रहा है और वो दोषी  देने योग्य है जबकि अभियोजन सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ संदेह से परे आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा है। इसलिए संदेह का लाभ देकर बरी किया जाता है। वहीं सलमान खान की ओर से सेशन कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील कर दी गई है और शुक्रवार सुबह कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा। गुरुवार की शाम को सलमान खान को जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

    गौरतलब है अदालत ने फिल्म अभिनेता सलमान खान को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अन्य सभी आरोपियों सैफ अली खान, अभिनेत्री तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम को अदालत ने बरी कर दिया है।

    वहीं दोषी करार देने के बाद सजा पर बहस करते हुए सलमान के वकील ने कोर्ट में कहा कि  वो वर्तमान में इसी तरह के किसी मामले में दोषी करार नहीं दिया दिए गए हैं। सलमान ने 20 साल तक इस मामले का ट्रायल पूरा किया है।   जब भी कोर्ट ने हाजिर होने को कहा तो वो हाजिर होते रहे। यहां तक कि वो पांच दिनों तक वन विभाग की हिरासत में भी रहे।  वन्य जीव सरंक्षण अधिनियम की धारा 51(5) के मुताबिकअगर किसी को पहले इसी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया हो और वो 18 साल से कम उम्र का ना हो तो परिवीक्षा  का लाभ  नहीं दिया जा सकता। लेकिन जिन मामलों में कम सजा का प्रावधान है उनमें भी इसका का लाभ दिया जा सकता है।  ऐसे में, वो एक अभिनेता है अगर जेल भेजा गया तो फिल्म जगत से जुडे लोगों की रोजी रोटी पर इसका असर पडेगा। ऐसे में अदालत नरमी बरते और परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दे।

    लेकिन अदालत ने फैसले में कहा कि  आरोपी के वकीलों का कहना है कि अन्य आरोपों में अदालत ने या तो आरोपमुक्त कर दिया और जिनमें दोषी करार दिया गया तो उनमें अपीलीय अदालत ने उसकी दोषसिद्दी को रद्द कर दिया।

    लेकिन जिस तरीके से आरोपी ने वन्य जीव सरंक्षण अधिनियम के तहत दो निर्दोष कृष्ण मृगों को बंदूक से मारकर अवैध शिकार किया  है और आरोपी एक अभिनेता है जिसका जनता अनुसरण करती है और  वर्तमान में वन्य जीवों के अवैध शिकार की बढती घटनाओं के साथ साथ  अपराध की गंभीरता, तथ्य, सबूतों व हालात को देखते हुए प्रोबेशन यानी परिवीक्षा अधिनियम के तहत छूट देना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

    अदालत ने कहा कि अभियुक्त के वकीलो द्वारा दलीलों का सम्मान करता है लेकिन अदालत का मत इससे अलग है। अपराध की प्रकृति, भिन्न हालात और तथ्यों के आधार पर आरोपी किसी तरह के लाभ का अधिकारी नहीं हो सकता।


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