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सुप्रीम कोर्ट सीबीएसई 12वीं की इकोनॉमिक्स की पुनर्परीक्षा को रद्द करने या फिर इसे वैकल्पिक बनाने की अर्जी पर सुनवाई को राजी हुआ

LiveLaw News Network
4 April 2018 4:30 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट सीबीएसई 12वीं की इकोनॉमिक्स की पुनर्परीक्षा को रद्द करने या फिर इसे वैकल्पिक बनाने की अर्जी पर सुनवाई को राजी हुआ
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्र लीक होने के कारण सीबीएसई 12वीं की इकोनॉमिक्स की परीक्षा दुबारा लेने के निर्णय को रद्द करने या फिर इस विषय को वैकल्पिक घोषित कर देने के मुद्दे पर दायर याचिका पर कल सुनवाई को राजी हो गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षा दुबारा होती है तो इस विषय को वैकल्पिक बना दिया जाए न कि आवश्यक।

गिरिजा कृशन वर्मा और साहिल तगोत्रा द्वारा अभिभावक मोनिका शर्मा, रशिम अरोरा और महिंदर प्रताप सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पुनर्परीक्षा की वजह से 12वीं के छात्रों के करियर की योजनाएं अधर में लटक गई हैं। जैसे :




  1. 1.12वीं की परीक्षा के बाद अधिकाँश छात्र प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में लग जाते हैं जो कि इस परीक्षा के तुरंत बाद आयोजित होते हैं। इन प्रवेश परीक्षाओं पर छात्रों का भविष्य निर्भर करता है कि वे आगे किस क्षेत्र में जाएंगे।

  2. 2.कुछ प्रवेश परीक्षाओं के लिए 12वीं की परीक्षा के बाद फॉर्म भरे जाते हैं और अधिकांश छात्र इसकी तैयारी में लग जाते हैं। 25 अप्रैल को सीबीएसई की पुनर्परीक्षा होने से छात्रों के अध्ययन की पूरी योजना और उनका सारा कार्यक्रम बिगड़ जाएगा और इसका उनके करियर पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।

  3. बहुत सारे छात्र विदेश यात्रा पर जाने वाले थे ताकि वहाँ वे करियर का विकल तलाश सकें।

  4. बहुत से छात्र ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण और इंटर्नशिप कर रहे हैं और अब इस पुनर्परीक्षा की वजह से उन्हें यह सब बंद करना होगा जिसकी वजह से उन्हें भारी आर्थिक घाटा उठाना पड़ेगा। इसके अलावा उन पर अनावश्यक दबाव भी पड़ेगा।


याचिका में कहा गया है, “छात्रों के लिए उनका एक एक मिनट कीमती है। पुनर्परीक्षा ने उनके अध्ययन की सारी योजना को इधर-उधर कर दिया है और आने वाली परीक्षाओं से उनका ध्यान बंटा दिया है। मानसिक और शारीरिक रूप से छात्र अप्रैल-मध्य तक परीक्षा ख़त्म कर लने के प्रति तैयार होते हैं क्योंकि उनका 12-14 घंटे हर दिन की पढ़ाई का कार्यक्रम होता है ताकि वे सीबीएसई के परीक्षा में अच्छा कर सकें।

याचिका में कहा गया है कि पुनर्परीक्षा में बैठने के लिए बाध्य करके भारी संख्या में छात्रों को सजा दी जा रही है जबकि गलती उनकी नहीं है। न्यायालय को यह ध्यान में रखना चाहिए कि बहुत सारी परीक्षाएं दाँव पर लगी हैं और छात्रों को इसके लिए जो मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ेंगी वह अलग।


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