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भारी आलोचना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने “गलत खबर” संबंधी दिशानिर्देश को वापस लेने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
3 April 2018 11:44 AM GMT
भारी आलोचना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने “गलत खबर” संबंधी दिशानिर्देश को वापस लेने का आदेश दिया
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समाज के अनेक वर्गों से हो रही आलोचना के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा “फेक न्यूज़” (गलत खबर) के बारे में जारी निर्देशों को वापस लेने का आदेश दिया। इस निर्देश में कहा गया था कि गलत खबर के प्रसार में लगे पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी द्वारा सोमवार शाम को जारी इस निर्देश की वापसी का आदेश देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस मुद्दे से भारतीय प्रेस परिषद निपटेगा।

इरानी ने गलत खबर के बारे में दिशानिर्देश को संशोधित किया और घोषणा की कि मान्यता दिए जाने के किसी भी आग्रह पर कार्रवाई तभी होगी जब पत्रकारिता के बारे में उसूलों को माना जाएगा।

जारी दिशानिर्देश में कहा गया कि गलत खबर के बारे में किसी भी तरह की शिकायत अगर वह प्रिंट मीडिया से संबंधित है तो उसे भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) को भेजा जाएगा और अगर यह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित है तो इसे न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) को भेजा जाएगा जो इसकी जांच करेगा और 15 दिनों में इसके बारे में रिपोर्ट देगा। रिपोर्ट आने तक संबंधित पत्रकार की मान्यता निलंबित रहेगी।

 “अगर गलत खबर के प्रसारण या उसके प्रकाशन की बात की पुष्टि हो जाती है तो पहली बार इस तरह की गलती पर मान्यता 6 महीने के लिए निलंबित होगी जबकि दूसरी बार इस तरह की गलती करने पर एक साल के लिए मान्यता रद्द कर दी जाएगी। तीसरी बार इस तरह की गलती करने पर मान्यता स्थाई तौर पर रद्द कर दी जाएगी”, ऐसा निर्देश में कहा गया।

इस घोषणा के बाद लोगों ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों से इसकी काफी आलोचना की और अपने गुस्से का इजहार किया।

इस घोषणा की आलोचना पत्रकारों के अलावा नेताओं ने भी की। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने ट्विट किया, “गलत खबर को नियंत्रित करने के प्रयास की मैं प्रशंसा करता हूँ पर मैं जानना चाहता हूँ – क्या गारंटी है कि इस निर्देश का प्रयोग ईमानदार पत्रकारों को परेशान करने के लिए नहीं होगा; यह निर्णय कौन करेगा कि कौन सी खबर गलत खबर है; इस बात की क्या गारंटी है कि इससे गलत गबरों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लग ही जाएगी; और क्या ऐसा सत्ता को परेशान करने वाले सवालों को रोकने के लिए नहीं किया जा रहा है?

इसके उत्तर में स्मृति इरानी ने कहा “...इसका निर्धारण पीसीआई और एनबीए करेगा...और आप जानते हैं कि ये दोनों ही संस्थान सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं”।

वरिष्ठ परकार शेखर गुप्ता ने ट्विट किया : किसी मुगालते में नहीं रहें, यह मुख्यधारा की मीडिया पर सबसे कड़ा हमला है। यह वैसा ही मामला है जैसा राजीव गाँधी के समय का अवमानना-विरोधी क़ानून। मीडिया को आपसी मतभेद भुलाकर इसका विरोध करना चाहिए”।

एमजे अकबर ने लिखा : गलत खबर के खिलाफ आवाज उठाइये।

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुनाल कामरा ने लिखा : भाजपा का हमें यह कहना कि गलत खबर के प्रति सावधान रहो वैसा ही है जैसे कोई सांप यह भाषण दे कि सांप का विष कितना खतरनाक होता है।

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