Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

3 कानून छात्रों ने CJI को पत्र लिखकर 2013 के मिसलेनियस दिनों में इंटर्न के प्रवेश पर पांबदी पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई

LiveLaw News Network
30 March 2018 3:21 PM GMT
3 कानून छात्रों ने CJI को पत्र लिखकर 2013 के मिसलेनियस दिनों में इंटर्न के प्रवेश पर पांबदी पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई
x

 भारत के सर्वोच्च न्यायालय में इंटर्नशिप कर रहे  कानून के तीन विद्यार्थियों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर 2013 में मिसलेनियस दिनों में  कानून छात्रों और पूर्व-नामांकन इंटर्नों के कोर्टरूम में प्रवेश करने से प्रतिबंध लगाने के आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।उन्होंने कहा है कि इस प्रतिबंध से उन्हें  नए  मामलों के दाखिले से संबंधित अहम सबक से वंचित होना पड़ रहा है।

 मॉर्डन कॉलेज ऑफ लॉ में तीसरे वर्ष के छात्र ऐश्वर्य  अग्रवाल ने  लॉयड लॉ कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र अमन शेखर और नीमीज़िया अमीन के साथ  सीजीआई मिश्रा को लिखा है कि 21 अगस्त 2013 को नोटिस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

दरअसल  2013 के नोटिस में घोषणा की गई थी कि 2 सितंबर, 2013 से कानून छात्रों और पूर्व-नामांकन इंटर्नों को मिसलेनियस दिवसों पर पास जारी नहीं किया जाएगा और अदालत में उनकी प्रविष्टि पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

 मिसलेनियस दिनों में कोर्टरूम  और गलियारों में भीड़ के कारण यह कदम जरूरी था। बहुत से वकीलों ने शिकायत की कि अदालत में  भीड़-भाड़ के कारण वो मामले के आने के बावजूद पहुंचने में असमर्थ होते हैं जिसकी वजह से पासओवर लेना पड़ता है।

सीजीआई मिश्रा को अपने पत्र में  छात्रों का कहना है, "... इंटर्न को अदालत में प्रवेश करने की इजाजत नहीं मिलने की वजह से छात्रों को नए मामलों के दाखिल होने की सीख से वंचित किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि कानून छात्रों पर पूर्ण प्रतिबंध, जो "इस मूल्यवान संस्था" का हिस्सा और पार्सल होंगे, पर पुनर्विचार की आवश्यकता है और अगर विद्यार्थियों को विविध दिवसों पर प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो भीड़ को विनियमित करने के लिए सुझाव दिए गए हैं।   सीजेआई के समक्ष रखे गए सुझाव हैं:




  • इंटर्न द्वारा ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया जायेगा, लेकिन प्रत्येक मिसलेनियस दिवस पर केवल100 को प्रवेश मिले यानी प्रत्येक कोर्टरूम में 10 को। आवेदन का चयन पहले आओ, पहले पाओ के  के आधार पर हो सकता है।

  • आवेदक के लिए संबंधित एडवोकेट ऑन रिकार्ड केप्रमाण पत्र द्वारा  प्रमाणित किया जा सकता है कि प्रशिक्षु ने संक्षिप्त पढ़ा है और वो अदालत की कार्यवाही और उसके परिणाम देखने में रूचि रखता है।

  • कोर्ट के अंदर30 बजे के बादइंटर्न को अनुमति दी जा सकती है


उन्होंने प्रतिबंध के कारण अपनी "मानसिक पीड़ा और कठिनाई" की व्याख्या करने के लिए CJI के साथ बैठक भी मांग भी की है।

Next Story