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भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी देवयानी खोबरागाड़े को CAT से राहत; दंड ख़त्म, पदोन्नति देने पर विचार [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
29 March 2018 3:28 PM GMT
भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी देवयानी खोबरागाड़े को CAT से राहत; दंड ख़त्म, पदोन्नति देने पर विचार [आर्डर पढ़े]
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भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी देवयानी खोबरागाड़े को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने राहत दी है। कैट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह उसकी सजा को 2016 में समाप्त माने और अगर वह फिट है तो उसको संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नति दे। खोबरागाड़े उस समय सुर्ख़ियों में आई थी जब अपनी नौकरानी से बदसलूकी के आरोप में उसे अमरीकी एजेंसियों ने न्यू यॉर्क में गिरफ्तार कर लिया था।

खोबरागाड़े के खिलाफ जांच पूरी करने में 20 महीने के विलंब के लिए विदेश मंत्रालय की आलोचना करते हुए कैट ने मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह देवयानी के मामले पर गौर करे। देवयानी को पदोन्नति के लायक नहीं माना गया और उसके खिलाफ जांच रिपोर्ट को 2016 में बंद लिफ़ाफ़े में रखा गया था कि उसके खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। उनके साथ सेवा में शामिल हुए उनके सहकर्मियों को पदोन्नति दी जा चुकी है।

देवयानी को सजा के रूप में नवंबर 2017 में एक साल के लिए पदावनति दी गई थी जिसके बाद उसने कैट में अपील की थी।

कैट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति परमोद कोहली और सदस्य केएन श्रीवास्तव ने 22 मार्च को अपने आदेश में कहा :




  1. i) आवेदक के खिलाफ लगाए गए दंड को09.2015 से31.08.2016 तक मान्य माना जाए।

  2. ii) आवेदक को संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नति के बारे में सील कवर को खोला जाए और अगर वह पदोन्नति के लिए फिट पाई जाती है तो उसे संयुक्त सचिव के पद पर11.2016 से पदोन्नति दी जाए जब उसके सहकर्मियों को भी पदोन्नति दी गई। ऐसा इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर किया जाए। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक हर तरह के लाभ की अधिकारी होगी।


देवयानी 1999 बैच की विदेश सेवा की अधिकारी है और उसे अपनी नौकरानी से बदसलूकी के आरोप में दिसंबर 2013 में न्यू यॉर्क में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले को लेकर भारत और अमरीका के बीच राजनयिक तनाव भी उत्त्पन्न हो गया था।

देवयानी ने बाद में विदेश मंत्रालय में सीसीएस नियम 1964 के अधीन एक रिपोर्ट फाइल किया।

दिसंबर 2014 में देवयानी को उसकी सेवा से मुक्त कर दिया गया और उसे नियमित प्रतीक्षा में रख दिया गया।

विदेश मंत्रालय ने मार्च 2015 में मीडिया में इंटरव्यू देने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई के बारे में मेमोरेंडम जारी किया।

इस बीच उसके बैच के अन्य अधिकारियों को संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नति दे दी गई लेकिन उसके नाम पर विचार नहीं किया गया और विभागीय जांच के लंबित होने के कारण उसको सील कवर में रखा गया।

देवयानी ने मंत्रालय के मेमो का जवाब दिया पर मंत्रालय ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अंततः 20 महीने बाद मंत्रालय ने यूपीएससी को 9 दिसंबर 2016 को पत्र लिखकर इस बारे में उसका सुझाव माँगा। देवयानी ने यूपीएससी में भी जाकर अपना पक्ष रखा।

यूपीएससी ने देवयानी का एक साल तक के लिए पदावनति की अनुशंसा की।

देवयानी की मंत्रालय और अपने विभाग से इस बारे में गुहार का कोई प्रभाव नहीं हुआ और अंत में उसने कैट में अपील की और आरोप लगाया कि उसके खिलाफ जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है।

केंद्र ने ट्रिब्यूनल से कहा कि देवयानी को 20 महीने के लिए चार्जशीट किया गया था और इस अवधि की समाप्ति पर अपने सहकर्मियों के साथ उसकी पदोन्नति होनी थी। इस तरह यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ जानबूझकर ऐसा किया गया है।


 
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