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1993 का दूरसंचार घोटाला : सुप्रीम कोर्ट 92 साल के सुखराम की ‘अपराधी होने की स्टांप’ हटाने की अर्जी पर करेगा सुनवाई [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
29 March 2018 2:46 PM GMT
1993 का दूरसंचार घोटाला : सुप्रीम कोर्ट 92 साल के सुखराम की ‘अपराधी होने की स्टांप’ हटाने की अर्जी पर करेगा सुनवाई [आर्डर पढ़े]
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मैं 92 साल का हूं। मैं एक दोषी व्यक्ति के रूप में मरना नहीं चाहता, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि 1993 टेलीकॉम उपकरण खरीद घोटाले में दोषी ठहराने के खिलाफ उनकी अपील की सुनवाई जल्द शुरू की जाए।

दिल्ली उच्च न्यायालय के दिसंबर 2011 के आदेश के खिलाफ पूर्व दूरसंचार मंत्री और दो अन्य द्वारा दायर तीन अपीलें सुनने के लिए सुखराम के वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर के सामने ये पेश किया। निचली अदालत ने उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।

 याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि अदालत गर्मी की छुट्टी के पहले हफ्ते के दौरान अपील की सुनवाई करेगी। सीबीआई के वकील पीके डे ने कहा कि उन्हें बेंच के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है।

"..... यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अपीलार्थी (सुखराम) जमानत पर है बहरहाल, सबमिशन यह है कि वह अपराधी के स्टांप  के साथ दुनिया छोड़ने का इरादा नहीं रखते, “ बेंच ने एक संक्षिप्त आदेश में कहा।

अन्य दो अभियुक्त- पूर्व नौकरशाह रुनू घोष और हैदराबाद स्थित एडवांस रेडियो मास्ट्स (एआरएम) प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पी रामाराव ने भी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में कदम रखा है। दिसंबर 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीनों की सजा को बरकरार रखा था और 1993 में दूरसंचार उपकरण खरीद सौदे में सुखराम, राव को तीन साल और घोष के लिए दो साल के कारावास की सजा सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने को कहा था।

हैदराबाद स्थित कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए  1993-94 में दूरसंचार उपकरणों की खरीद में राम राव की फर्म के पक्ष में सरकारी खजाने को 1.66 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया।


 
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