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बड़े पैमाने पर जनता को आतंकित करना एक जघन्य अपराध है और इससे कठोर हाथों से निपटा जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरमीत राम रहीम के समर्थकों को जमानत से इनकार किया [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
25 March 2018 3:40 PM GMT
बड़े पैमाने पर जनता को आतंकित करना एक जघन्य अपराध है और इससे कठोर हाथों से निपटा जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरमीत राम रहीम के समर्थकों को जमानत से इनकार किया [आर्डर पढ़े]
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याचिकाकर्ताओं द्वारा सामान्य जनता के दिमाग में आतंक पैदा करना, पूरी तरह से सशस्त्र, पूरे शहर को विवश करना, कानून का उल्लंघन, ये सब सिर्फ जॉय राइड के लिए किया गया। तथ्यों से पता चलता है कि उन्होंने उस समय राज्य के शासक के रूप में खुद को पेश किया, अदालत ने टिप्पणी की। 

 पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम कोबलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राज्य में हिंसा करने और अफरातफरी मचाने वाले उनके समर्थकों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति महावीर सिंह सिंधु ने अपने जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, "उनके मन में न्यायालय के प्रति कोई सम्मान नहीं है और इस प्रकार जब उन्होंने कानून के अस्तित्व और इसकी महिमा की चुनौती दी है तो यह न्यायालय उनके पक्ष में उदारवादी दृष्टिकोण लेने का कोई मौका नहीं दे सकता और उन्हें जमानत पर रिहा करने के लिए कोई रियायत नहीं दी जा सकती। "

अदालत ने राज्य पुलिस को इस मामले के परिदृश्य के मद्देनजर शिकायतकर्ता मदन लाल, तीरथपाल और गुरप्रीत सिंह के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों के जीवन और स्वतंत्रता की उचित देखभाल करने का निर्देश दिया।

 कोर्ट ने टिप्पणी की  कि आरोपियों ने डेरा चीफ की सजा के कारण समाज को अस्थिर करने का एक बहुत ही निराशाजनक विचार किया और सरकार और कोर्ट पर बलात्कार के मामले में एक दोषी को रिहा करने के लिए अत्यधिक दबाव डाला था।

कोर्ट ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विश्वास के नाम पर इन तत्वों में से मुट्ठी भर लोगों ने कानून को अपने हाथों में ले लिया और सामान्य जनता के साथ-साथ पूरे प्रशासन को पंजों पर खड़ा कर दिया। यहां तक ​​कि जीवन रक्षक एजेंसियों को भी खतरे में डाला गया और अंततः शांति बनाए रखने के लिए कर्फ्यू लगाया गया।

गैरकानूनी जमावड़े  के सदस्यों के रूप में अन्य सह-आरोपी के साथ याचिकाकर्ताओं द्वारा पूरे शहर को रोक दिया गया।

 वे सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर रहे थे, आग से शरारतपूर्ण तरीके से खेल रहे थे, वाहनों को आग लगा रहे थे और सामान्य जनता के जीवन को खतरे में डाल रहे थे। ऐसे व्यक्तियों द्वारा कानून को हाथ में लेने के बाद जो  संतोष की भावना महसूस की गई उसे पूरी शक्ति से गिराया जाना चाहिए ताकि कानून के शासन को बनाए रखा जा सके और समाज की रक्षा हो सके अन्यथा हर कोई असुरक्षित महसूस करता रहेगा और पूरी अराजकता होगी।”


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