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सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए 12 राज्यों से मांगा जवाब

LiveLaw News Network
23 March 2018 9:40 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए 12 राज्यों से मांगा जवाब
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सुप्रीम कोर्ट ने 11 राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए उठाए गए कदम और इसमें हुई देरी को लेकर दो हफ्तों के भीतर एक हलफनामा दायर करें।

शुरूआत में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और आर बानुमति  की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील और दिल्ली भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय के वकील गोपाल शंकरनारायणन से पूछा कि कौन से राज्य हैं, जिन्होंने लोकायुक्त की नियुक्ति की है और कौन से राज्य हैं जिन्होंने नियुक्ति नहीं की है ?

उनके पास एक निश्चित जवाब नहीं था और कहा गया कि वर्तमान में उनकी कोई सूचना नहीं है तो जस्टिस गोगोई ने एक नोट से पढ़ा जिसके मुताबिक अरूणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुदुचेरी, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और त्रिपुरा ने लोकायुक्त या  या उपलोकायुक्त नियुक्त नहीं किया था।

 पीठ ने इन 11 राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे नियुक्ति करने के लिए कौन-से कदम उठाए गए हैं और देरी या गैर-नियुक्ति के कारणों को भी निर्दिष्ट करते हुए  2 सप्ताह के भीतर अदालत में एक हलफनामा दाखिल करें।  बेंच केंद्र सरकार और राज्यों में लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति के लिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है जैसा कि 2013 में पारित केंद्रीय कानून में दिया गया था। याचिका में  प्रत्येक विभाग में सेवा का अधिकार-एक नागरिक चार्टर की मांग की गई है ताकि सामानों और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो सके क्योंकि यह अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न हिस्सा है।

यह लोकायुक्तों के प्रभावी कामकाज के लिए पर्याप्त बजट आवंटन और आवश्यक बुनियादी ढांचे के लिए सभी राज्यों को दिशा निर्देश देने की मांग भी की गई है।

 उपाध्याय ने आरोप लगाया कि हालांकि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013, को  1 जनवरी 2014 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई थी और 16 जनवरी, 2014 से ये लागू हुआ लेकिन कार्यपालिका ने लोकपाल की नियुक्ति  नहीं की है।

 "लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 63 में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य अधिनियम की शुरुआत की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर लोकायुक्त के रूप में जाना जाने वाला एक संगठन स्थापित करेगा, हालांकि, कई राज्यों ने अब तक ऐसा नहीं किया है  और कई राज्यों ने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के अनुरूप लोकायुक्त अधिनियम पारित नहीं किया है। "

 याचिकाकर्ता के मुताबिक कई राज्य सरकारों ने पर्याप्त बुनियादी ढांचा, पर्याप्त बजट और कार्यबल उपलब्ध ना कराकर लोकायुक्त को कमजोर कर दिया है।  ऐसे में इस संबंधी दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

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