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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में संभवत: पहली बार PPT, CEO ने कहा आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित

LiveLaw News Network
23 March 2018 5:44 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में संभवत: पहली बार PPT, CEO ने कहा आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित
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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में संभवत: पहली बार देश की सबसे बड़ी अदालत ने  आधार योजना के विभिन्न पहलुओं पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सीईओ को अनुमति दी, जिसके लिए सरकार ने पहले ही 9,000 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।

 मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ के सामने सीईओ डॉ अजय भूषण पांडे ने करीब  80 मिनट तक  प्रस्तुतीकरण किया और डेटा की सुरक्षा व लीक  के संबंध में आशंका को खारिज करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि डेटा एन्क्रिप्टेड और डिपॉजिटरी में सुरक्षित है, जो इंटरनेट से जुड़ा नहीं है और लीक या सुरक्षा उल्लंघन की कोई संभावना नहीं है। आधार की कमी के लिए किसी भी व्यक्ति को वित्तीय बहिष्कार और लाभों से वंचित करने के लिए एक तंत्र के लिए प्रश्न पूछने पर सीईओ ने कहा कि आधार के प्रमाणीकरण के अभाव में किसी भी व्यक्ति को लाभ, सब्सिडी या सेवा से वंचित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि `अपवाद प्रबंधन तंत्र 'को यह सुनिश्चित करने के लिए कानून में प्रदान किया गया है कि भले ही उंगली के प्रिंट विवरण की प्रमाणीकरण में विफलता हो, फिर भी चेहरे की छाप या मोबाइल फोन के माध्यम से' एक बार पिन '(ओटीपी) के माध्यम से अन्य साधन उपलब्ध हैं ।

उन्होंने कहा कि पहचान पत्र प्रदान करने का इस तरह का प्रयोग कभी भी मानव जाति के द्वारा  करने का प्रयास नहीं हुआ है और अब तक 1.2 अरब से ज्यादा नागरिकों के पास आधार है। उन्होंने कहा कि आधार एक राष्ट्रीय स्वीकार्य मजबूत सत्यापन कार्ड है। लीक पर संदेह को हटाते हुए  उन्होंने कहा कि सभी बॉयोमैट्रिक डेटा  2048 बिट एन्क्रिप्शन के साथ एन्क्रिप्ट किए गए हैं और एक एन्क्रिप्टेड कुंजी को तोड़ने के लिए ब्रह्माण्ड की उम्र से अधिक की आवश्यकता होगी।

बेंच के एक सवाल कि क्या बॉयोमैट्रिक डेटा साझा किया जा रहा है, उन्होंने स्पष्ट किया कि ई-केवाईसी के माध्यम से बायोमैट्रिक जानकारी के बिना बैंकों को केवल व्यक्तिगत जानकारी साझा की जाती है, जो कि सुरक्षित है और किसी के साथ साझा नहीं की गई है।

इस साल जुलाई से चेहरे की पहचान प्रमाणीकरण के लिए इस्तेमाल की जाएगी और जल्द ही आधार पर क्यूआर कोड के साथ फोटो होगा। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड पर कुल खर्च एक डॉलर से भी कम है।

जस्टिस सिकरी ने पूछा कि क्या इस्तेमाल किया गया सॉफ्टवेयर विदेशी कंपनियों से  लिया गया है तो सीईओ ने स्पष्ट किया है कि बॉयोमैट्रिक मिलान के लिए सॉफ्टवेयर बाहर से लिया है और यूआईडीएआई के पास इसे उपयोग करने का लाइसेंस है, "लेकिन सॉफ्टवेयर डेटा हमारे नियंत्रण में है।” इसके अलावा आधार डेटा सर्वर इंटरनेट से जुड़ा  नहीं हैं, बल्कि लीज लाइनों  के साथ जुड़ा हुआ है।

जब न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि लोग प्रमाणीकरण की विफलता के कारण पीड़ित हैं तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य आधार के ना होने पर लाभों से इनकार करना नहीं  है। जब न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने बताया कि प्रमाणीकरण की विफलता के कारण लाभों से इनकार करना एक बात है और प्रमाणीकरण के बाद भी लाभ प्रदान करने में विफलता दूसरी बात है तो सीईओ ने कहा कि ऐसी आकस्मिकता को ध्यान में रखा गया है और कोई भी लाभ से वंचित नहीं होगा। पहचान के अन्य माध्यम हैं जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है। ये सुनवाई 27 मार्च को भी जारी रहेगी।


 
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