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शराब की दुकानों और आवासीय क्षेत्रों में पब्स पर पाबंदी, बेहतर यातायात और पार्किंग प्रबंधन के वादे के साथ डीडीए ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के मास्टर प्लान पर लगे प्रतिबन्ध हटाने को कहा [शपथ पत्र पढ़ें]

LiveLaw News Network
21 March 2018 5:55 AM GMT
शराब की दुकानों और आवासीय क्षेत्रों में पब्स पर पाबंदी, बेहतर यातायात और पार्किंग प्रबंधन के वादे के साथ डीडीए ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के मास्टर प्लान पर लगे प्रतिबन्ध हटाने को कहा [शपथ पत्र पढ़ें]
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डीडीए ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को उसकी चिंताओं का क्रमवार जवाब देने का प्रयास किया है।

सीलिंग मामले में हलफनामा दायर कर दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह दिल्ली मास्टर प्लान में संशोधन पर लगी पाबंदी को हटा ले जो कि वाणिज्यिक परिसंपत्तियों को मिश्रित भूमि प्रयोग में ढील देने को लेकर है।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6 मार्च को दिल्ली के मास्टर प्लान में किसी भी तरह के संशोधन पर पाबंदी लगा दी थी क्योंकि डीडीए ने कोर्ट के कहे मुताबिक़ 9 फरवरी को हलफनामा दायर कर यह नहीं बताया था कि इस प्रस्तावित संशोधन का पर्यावरण, यातायात एवं अन्य सुरक्षात्मक मुद्दों पर क्या असर पड़ेगा।

डीडीए ने अपने हलफनामे में कहा है कि दिल्ली की निरंतर बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए यहाँ अतरिक्त आवास, रोजगार, सामाजिक आधारभूत संरचना, शॉपिंग सेंटर और सार्वजनिक और व्यक्तिगत परिवहन आदि की जरूरत होगी। उपयुक्त मार्केट प्लेस/केन्द्रों के लिए जगह की कमी की वजह से आवासीय क्षेत्रों के नजदीक वाणिज्यिक गतिविधियों के मिश्रित प्रयोग की अनुमति की जरूरत बढ़ गई है ताकि लोगों को अपनी आवश्यकता के लिए शहर के अन्य क्षेत्रों में नहीं जाना पड़े।

सुप्रीम कोर्ट के नौ प्रश्न और डीडीए का जवाब

1) सुप्रीम कोर्ट : क्या संशोधन के प्रस्ताव के पहले पर्यावरण पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया?

डीडीए : डीडीए अधिनियम 1957 के तहत मास्टर प्लान में संशोधन के लिए पर्यावरण के प्रभाव का आकलन करने का अधिकार उसे नहीं दिया गया है। प्रस्तावित संशोधन का प्रस्ताव कॉलोनियों के वर्तमान जनसंख्या घनत्व में किसी भी तरह के परिवर्तन करने की प्रकृति का नहीं है न ही इसमें किसी तरह के महत्त्वपूर्ण बदलाव की कोई योजना है और इनका संबंध भूमि के प्रयोग से नहीं है और इसकी वजह से इनके कारण सड़कों पर कोई जाम लगने की आशंका नहीं है, इनकी वजह से पार्किंग की समस्या नहीं बढ़ेगी, प्रदूषण में वृद्धि नहीं होगी या ये वर्तमान बुनियादी सुविधाओं या नागरिक सुविधाओं पर कोई दबाव नहीं डालेंगे।

हालांकि, स्थानीय निकायों और यातायात विभाग द्वारा कुछ बातों पर ध्यान देने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें भीड़भाड़ कम करने, प्रदूषण नियंत्रित करने और पर्यावरण क्षरण का ख़याल रखने की बातें शामिल हैं।




  • मिश्रित भूमि उपयोग के तहत आवासीय परिसरों में शराब की दुकानें, बार, डिस्को, क्लब्स और पब्स की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस तरह की सुविधाओं को अधिसूचना की तिथि के छह माह के भीतर अन्य स्थानों पर ले जाया जाएगा।

  • एयर कंडीशनिंग की आउटडोर इकाइयों को प्लाट लाइन से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी और इन्हें छत पर लगाया जाएगा।

  • एग्जॉस्ट के डक्ट को आम रास्तों की या आवासीय प्लाट की ओर खुलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।


2) सुप्रीम कोर्ट : दिल्ली शहर में भीड़भाड़ को लेकर क्या कोई अध्ययन किया गया है या इसके बारे में किसी तरह के तथ्य या आंकड़े उपलब्ध हैं?

डीडीए : एमसीडी ने इस बारे में कुछ रिकॉर्ड और वर्तमान और प्रस्तावित पार्किंग स्थलों के बारे में विश्लेषण उपलब्ध कराए हैं और इसमें इन स्थलों पर वाहनों को खड़ी करने की क्षमता के बारे में भी जानकारियाँ हैं। बहुमंज़ली पार्किंग स्थलों को विकसित करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में लगातार सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।

3)सुप्रीम कोर्ट : प्रस्तावित परिवर्तनों को देखते हुए  क्या दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर यातायात के सक्षम प्रबंधन के लिए कोई कदम उठाया गया है?

डीडीए :




  • एक एकीकृत यातायात और परिवहन सुविधा की स्थापना की गई है।

  • पर्याप्त पार्किंग स्थल की व्यवस्था, वाणिज्यीकरण और गतिविधियों के मिश्रित प्रयोग और विभिन्न तरह के शुल्कों को सुव्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जाएगा।

  • आवासीय क्षेत्रों में निवासियों के लिए पार्किंग स्थलों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया जाएगा।


4) क्या आग से बचाव के उपायों और आग बुझाने वाली गाड़ियों के पहुँचने के मामले पर गौर किया गया है?

डीडीए यह प्रस्ताव किया गया है कि अतिरिक्त एफएआर/जोड़ या बदलाव/परिवर्तन/पुनर्विकास को संशोधित निर्माण योजना के तहत स्वीकृत कराना होगा और इसे सभी संबंधित वैधानिक निकायों से अनुमोदन जरूरी होगा ताकि संरचनात्मक सुरक्षा और सुरक्षा नियमों का पालन हो सके।

5) क्या पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाने जैसी बातों पर गौर किया गया है?

डीडीए :




  • स्थानीय निकाय यातायात पुलिस के साथ मिलकर समय समय पर यातायात का आकलन और उसका अध्ययन करेगा।

  • शॉपिंग सेंटरों पर आने वाले वाहनों की पार्किंग को सार्वजनिक क्षेत्रों और आवासीय कॉलोनियों तक पसरने नहीं दिया जाएगा।


6) क्या नागरिक सुविधाएं जैसे पीने और अन्य कार्यों के लिए पानी की उपलब्धता, सीवेज प्रबंधन, ठोस कचरे का प्रबंधन और बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था आदि है?

डीडीए : प्रस्तावित संशोधन के कारण कॉलोनियों के अंदर वर्तमान जनसंख्या/घनत्व में कोई बदलाव नहीं है सो वर्तमान बुनियादी सुविधाओं पर दबाव न्यूनतम होगा।

 7) क्या वर्तमान और भविष्य में बनाने वाले भवनों में सुरक्षा उपायों का ख़याल रखा गया है और क्या इस तरह के सभी भवनों का अध्ययन किया गया है कि ये सुरक्षित हैं कि नहीं?

डीडीए : प्रदूषणकारी और खतरनाक सेवाओं की अनुमति आवासीय क्षेत्रों में नहीं दी जाएगी।

8)  क्या दिल्ली में जनसंख्या के घनत्व जो कि 1.67 से 2 करोड़ के बीच है, को ध्यान में रखा गया है?

डीडीए : प्रस्तावित बदलाव का वर्तमान जनसंख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की संख्या में वृद्धि करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसमें पर्याप्त पार्किंग स्थलों और विभिन्न तरहके शुल्कों को व्यवस्थित करने पर जोर होगा।

 9) दिल्ली में 2006 के बाद से विशेषकर जब सड़कों को लेकर मिश्रित प्रयोग को उदार बनाया गया, प्रदूषण की स्थिति के बारे में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के पास कोई सूचना या इससे संबंधित आंकड़े उपलब्ध हैं? अगर हाँ, प्रदूषण को कम करने के लिए क्या उपाय किए गए?

डीडीए : इस प्रश्न का जवाब संबंधित प्राधिकरण दे सकता है। पर मास्टर प्लान में यह प्रस्ताव किया गया है कि सार्वजनिक भूमि पर सभी तरह के अवैध कब्जे हटा दिए जाएंगे और इन स्थानों का पार्कों या हरित क्षेत्र के रूप में प्रयोग होगा।


 
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