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'ऋण वसूली ट्रिब्यूनल की सरंचना पर फिर से विचार करने की जरूरत पड़ सकती है ‘ : SC ने केंद्र को अमिक्स के सुझाव पर गौर करने को कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
21 March 2018 4:47 AM GMT
ऋण वसूली ट्रिब्यूनल की सरंचना पर फिर से विचार करने की जरूरत पड़ सकती है ‘ : SC ने केंद्र को अमिक्स के सुझाव पर गौर करने को कहा [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि कानून के शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) की संरचना में स्थायी काडर, स्वतंत्र चयन प्रक्रिया, स्वायत्त जवाबदेही और अनुशासनिक तंत्र के सुझाव को ध्यान में रखते हुए फिर से विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है और ये  संवैधानिक अदालतों के न्यायक्षेत्र के लिए अंतिम निर्णय का विषय होगा।

 न्यायमूर्ति ए के गोयल, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने ये टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी दतार द्वारा प्रस्तुत सुझाव नोट पर की जो इस मामले में अमिक्स क्यूरी नियुक्त किए गए थे।

अमिक्स द्वारा सुझाव 

 वरिष्ठ वकील द्वारा ये सुझाव दिए गए हैं:




  • सेवानिवृत्त व्यक्तियों की शॉर्ट टर्म नियुक्तियों की बजाय ट्रिब्यूनल के लिए एक नियमित काडर होना चाहिए।

  • जिला न्यायपालिका के संवर्ग में उपयुक्त अस्थायी या स्थायी वृद्धि के मुताबिक सेवारत

  • न्यायिक अधिकारियों कोभी ट्रिब्यूनल में नियुक्त किया जा सकता है।

  • चयन एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता से होना चाहिए, जो एक स्वायत्त निकाय द्वारा आयोजित किया जा सकता है, जो कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता की आवश्यकताओं के अनुरूप है।

  • अनुशासनात्मक तंत्र समेत काडर नियंत्रण या तो उच्च न्यायालयों या एक स्वायत्त निकाय के पास होना चाहिए जो न्यायपालिका की आजादी की अवधारणा के अनुसार होना चाहिए।

  • न्यायाधिकरण / अपीलीय न्यायाधिकरण का आदेश अंतिम होना चाहिए, केवल संवैधानिक उपाय के अधीन।

  • मुकदमेबाजी की कई परतों से बचने के लिए ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ कोई वैधानिक अपील नहीं दी जानी चाहिए जो कार्यवाही में देरी करता है।


पीठ ने यह भी पाया कि ऊपर के मुद्दों में नीतिगत मामलों को शामिल किया गया है और विधायी परिवर्तनों के लिए भी कहा जा सकता है। बेंच ने केंद्र सरकार से इस मामले पर विचार करने और इसकी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए कहा। अदालत ने मामले को 3 अप्रैल, 2018 को सूचीबद्ध किया है।

पृष्ठभूमि

केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक विशेष याचिका याचिका पर विचार करते हुए जिसमें  प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण वित्तीय आस्तियों और सुरक्षा ब्याज अधिनियम, 2002 की धारा 13 (5 ए) के खिलाफ चुनौती को खारिज कर दिया था, बेंच ने इस मुद्दे पर विचार किया था कि क्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए ऋण वसूली ट्रिब्यूनल में नियुक्ति के लिए मानदंडों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी दातार को अमिक्स   क्यूरी के रूप में नियुक्त किया गया।

न्यायमूर्ति ए के गोएल की अध्यक्षता वाली दो न्यायाधीशों की एक बेंच ने उस वक्त कहा था : “ सुनवाई के दौरान हमारा ध्यान ऋण वसूली संबंधी न्यायाधिकरणों में नियुक्ति के नियमों के मुद्दे और इसके कार्य की ओर आकर्षित किया गया। बताया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यवाही, जो ऋण व दिवालियापन अधिनियम, 1993 के तहत प्रदान की गई है, वो न्यायपालिका की आजादी को बनाए रखने के लिए इस न्यायालय के फैसलों में की गई टिप्पणियों के अनुसार नहीं है। "

 

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