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SC ने कार्ति को ED की गिरफ्तारी से सरंक्षण 26 मार्च तक बढ़ाया, दिल्ली हाईकोर्ट से ED के लंबित मामले ट्रांसफर किए [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
15 March 2018 1:08 PM GMT
SC ने कार्ति को ED की गिरफ्तारी से सरंक्षण 26 मार्च तक बढ़ाया, दिल्ली हाईकोर्ट से ED के लंबित मामले ट्रांसफर किए [आर्डर पढ़े]
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कार्ति चिदंबरम को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए गिरफ्तारी से अंतरिम सरंक्षण को 22 मार्च से चार दिन और  26 मार्च तक बढ़ा दिया है।  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी मामले से संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित सभी मामलों को ट्रांसफर कर लिया है।

 "हम मानते हैं कि कई उच्च न्यायालयों के मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए) की धारा 19 की व्याख्या पर विरोधाभासी विचार हैं  जो कि अभियुक्त को गिरफ्तार करने के लिए ईडी की शक्ति से संबंधित है, “ मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई  चंद्रचूड़ शामिल हैं, ने कहा।

अदालत ने कहा कि 26 मार्च को मामले की सुनवाई होगी और पीएमएलए की धारा 19 की व्याख्या के बारे में सवाल का जवाब दिया जाएगा। इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने  ईडी मामले में गिरफ्तारी से कार्ति चिदंबरम के अंतरिम सरंक्षण 20 मार्च से 22 मार्च तक बढ़ा दिया था।

 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार  लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ईडी द्वारा संभावित गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राहत के लिए कार्ति दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचे थे।

 सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च को मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा था।अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने पास ही वापस ले लिया है।

इससे पहले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जो इस मामले में ईडी और सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि अंतरिम सरंक्षण के लिए कार्ति की याचिका सर्वोच्च न्यायालय के न्यायक्षेत्र का दुरुपयोग थी ताकि अग्रिम जमानत प्राप्त हो सके। मेहता ने कहा था कि मूल अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्ति द्वारा दायर याचिका केवल "अग्रिम जमानत पाने का प्रयास" थी।

 

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