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बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, फीस के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य स्वतंत्र [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
7 March 2018 11:22 AM GMT
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, फीस के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य स्वतंत्र [आर्डर पढ़े]
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अभिभावकों को एक बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र एजुकेशन इंस्टिट्यूट (रेग्यूलेशन ऑफ़ फीस) एक्ट, 2011 सभी स्कूलों पर लागू होता है और राज्य उस किसी भी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जो इस क़ानून को नहीं मानता है।

हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि फीस बढ़ाए जाने के खिलाफ अभिभावकों द्वारा दायर याचिकाएं और इनको चुनौती देने वाली स्कूलों की याचिकाओं का अदालतों में लंबित होना इस अधिनियम को लागू होने में आड़े नहीं आता।

यह आदेश न्यायमूर्ति बीआर गवई और भारती एच डांगरे की पीठ ने दिया।

इन याचिकाओं पर अब सुनवाई 20 मार्च को होगी।

पीठ कुछ अभिभावकों और कुछ अल्पसंख्यक स्कूलों जैसे रयान इंटरनेशनल स्कूल, सैंट जोसफ हाई स्कूल और सैंट जेवियर हाई स्कूल द्वारा अधिनियम को लागू किए जाने के मुद्दे को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है।

एक अभिभावक विश्वनाथन ने 2015 में हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस अधिनियम को लागू कराने का आग्रह किया क्योंकि रयान इंटरनेशनल और इसी तरह के अन्य स्कूलों ने अधिनियम के अनुरूप अभिभावक शिक्षक संघ की अनुमति के बिना फीस बढ़ा दिया था।

अभिभावकों ने उनसे वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करने को कहा पर उनकी यह मांग अनसुनी कर दी गई।

सुनवाई के दौरान अभिभावकों का कहना था कि अधिनियम अल्पसंख्यक और अन्य स्कूलों में भेद नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल यह भी कहते हैं कि चूंकि मामला अभी कोर्ट में लंबित है इसलिए अधिनियम के प्रावधानों को नहीं मान सकते। अल्पसंख्यक स्कूलों का कहना है कि सरकार उनको निर्देश नहीं दे सकती।

यह गौर करने वाली बात है कि महाराष्ट्र एजुकेशन इंस्टिट्यूट (रेग्यूलेशन ऑफ़ फीस) एक्ट, 2011 की धारा 3 के तहत अधिक फीस वसूलने को गैर कानूनी और अपराध करार दिया गया है और सभी स्कूलों में इस अधिनियम के तहत अभिभावक शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन करने को कहा गया है।


 
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