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लोकपाल की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया और वक्त, 14 अप्रैल को सुनवाई

LiveLaw News Network
6 March 2018 7:46 AM GMT
लोकपाल की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया और वक्त, 14 अप्रैल को सुनवाई
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लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ये प्रक्रिया जारी है और इसमें कुछ वक्त लगेगा।

 केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मंगलवार को न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ), लोकसभा अध्यक्ष और विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के बीच एक मार्च को बैठक तय थी। लेकिन इसमें कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खडगे ने भाग नहीं लिया।

इसके तहत पहले नामचीन हस्ती का चुनाव किया जाएगा और फिर लोकपाल के लिए नाम तय किए जाएंगे।

इस दौरान जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि इस प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा तो AG ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द इसे पूरा करने की कोशिक कर रही है।

पीठ ने केंद्र सरकार को इसके लिए 14 अप्रैल तक का और वक्त दिया है। मामले की सुनवाई उसी दिन होगी।

पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने  सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2014 में देरी के बाद अब लोकपाल की नियुक्ति के लिए कदम उठाए गए हैं और 1 मार्च को चयन पैनल की एक बैठक आयोजित की जाएगी।

  केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ), लोकसभा अध्यक्ष और विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के बीच एक मार्च को बैठक तय है।

उन्होंने यह भी कहा कि चयन पैनल की बैठक में देरी वरिष्ठ वकील पीपी राव की मौत के कारण हुई जो पिछले साल सितंबर में पैनल में शामिल थे।

सरकार के सबसे बडे कानून अधिकारी की दलीलों को स्वीकार करते हुए बेंच ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव को 5 मार्च तक इस संबंध में उठाए गए कदम के बारे में विस्तार से शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

एनजीओ कॉमन कॉज द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई 6 मार्च को तय की थी।

लोकपाल अधिनियम के तहत, जिसे संसद में 2013 में पारित किया गया था, लेकिन अगले साल राष्ट्रपति द्वारा अपनी सहमति देने के बाद इसे प्रभावी किया गया।

 लोकपाल को चयन समिति द्वारा नियुक्त किया जाएगा जिसमें प्रधान मंत्री, सीजेआई या उनके नामांकित व्यक्ति और एक प्रतिष्ठित न्यायविद् शामिल हैं।

सरकार का रुख है कि विपक्ष के नेता (एलओपी) की अनुपस्थिति की वजह से देरी हुई।

चूंकि कांग्रेस के पास लोकसभा में  कुल सीटों की आवश्यक 10 प्रतिशत सीट नहीं हैं, इसलिए पार्टी को 2014 के आम चुनाव के बाद एलओपी की स्थिति से वंचित किया गया था।

 अप्रैल 2017 में शीर्ष अदालत ने कहा था कि भ्रष्टाचार विरोधी निकाय को बिना देरी के स्थापित किया जाना चाहिए और एलओपी की अनुपस्थिति को नियुक्ति के रास्ते में नहीं आना चाहिए। हालांकि बाद में सरकार ने लोकपाल के चयन पैनल और सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति पैनल में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को  शामिल करने का फैसला किया।

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