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INX मीडिया मामला : कार्ति चिदंबरम को विशेष अदालत ने 6 मार्च तक सीबीआई हिरासत में भेजा

LiveLaw News Network
1 March 2018 4:30 PM GMT
INX मीडिया मामला : कार्ति चिदंबरम को विशेष अदालत ने 6 मार्च तक सीबीआई हिरासत में भेजा
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INX मीडिया मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने कार्ति चिदंबरम को 6 मार्च तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।

करीब चार घंटे की सुनवाई के बाद विशेष न्यायधीश सुनील राणा ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि केस के तथ्यों व हालात को देखते हुए सीबीआई को रिमांड देना जरूरी है।

गुरुवार को हुई सुनवाई में सीबीआई की ओर से पेश ASG तुषार मेहता ने कहा कि बुधवार को कोर्ट ने कहा था कि मामले की आगे जांच होनी चाहिए। 14 दिन का और रिमांड दिया जाए क्योंकि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है  अब हिरासत में कुछ अन्य दस्तावेज बरामद करने हैं और आरोपी से सबूतों, गवाहों व सह आरोपियों के साथ दिल्ली व बाहर आमना सामना कराना है।  इस केस में एक सह आरोपी ने  CrPC 164  के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिए हैं इसके तहत कहा गया है कि महिला व उसके पति एक होटल में INX मीडिया की FIPB इजाजत के लिए मिले थे और कार्ति ने उनसे एक मिलियन डॉलर मांगे।

सीबीआई सिर्फ बयानों पर नहीं जा रही है बल्कि जांच में होटल का ब्योरा, कार रैंटल व ई मेल सब मेल खा रहे है। इस बात के सबूत हैं कि पैसे मांगे गए और दिए गए।यहां सारा मामला जो कंपनियों को लेकर है चेस मैनेजमेंट कल्संटेंसी और एडवांटेज स्ट्रेजिक कल्संटेसी और दोनों से ही लेन देन किया गया। सीबीआई ने कुछ गोपनीय दस्तावेज कोर्ट को सौंपे।

मेहता ने कहा कि ये बदले की कार्रवाई नहीं है। एजेंसी के पास पुख्ता सबूत हैं। एजेंसी को आरोपी से पूछताछ करने के वैधानिक अधिकार को दिया जाए। ये भ्रष्टाचार निवारण के तहत गंभीर अपराध है।

वहीं कार्ति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी की जरूरत क्या थी, ये बताने में एजेंसी नाकाम रही है। पिछले साल अगस्त के बाद सीबीआई मे कभी पूछताछ नहीं की। अब छह महीने बाद एजेंसी कुंभकर्ण की नींद से जागी और कार्ति को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास नया कुछ नहीं है। सब दलीलें मद्रास हाईकोर्ट के सामने दी जा चुकी हैं। उसके बावजूद हाईकोर्ट ने कार्ति को विदेश जाने की इजाजत दी।

उन्होंने कहा कि क्या 2007-2008 में हुए अपराध के लिए 2014 के कानून के तहत सजा दी जा सकती है। जो आरोप लगाए गए हैं उनमें सात सजा का प्रावधान है, 2014 में इन आरोपों की सजा दस साल की गई।कार्ति कभी भी एडवांटेज स्ट्रेजिक कंपनी के डायरेक्टर नहीं रहे।

यहां कहा जा रहा है कि 2007 में अपने पिता के पद का लाभ उठाकर INX को फायदा पहुंचाया गया लेकिन 2008 में वीर सांघवी ने सूचना प्रसारण मंत्रालय को INX मीडिया की जांच हो मंत्रायल ने इसे वित मंत्री पी चिदंबरम को भेजा जो कार्ति के पिता हैं  चिदंबरम ने इसे कारपोरेट अफेयर्स भेजा जो सचिन पायलेट के पास था इसके बाद SFIO से इसकी जांच हुई।

सिंघवी ने कहा कि सीबीआई पीटर और इंद्राणी मुखर्जी पर लगे हत्या के आरोप की जांच कर रही है क्या ऐसे लोगों के बयान मान्य हो सकते हैं जो कई साल से जेल में हैं। दस साल बाद मुखर्जी बयान दे रहे हैं क्योंकि उनके खिलाफ जांच कराई गई। तथ्यों को छिपाने, तरोडने मरोडने की हद पार हो चुकी हैं। कार्ति मद्रास हाईकोर्ट के आदेश से 20-25 दिनों के लिए बाहर गए थे ये विदेश से वक्त पर देश में लौटने का इनाम है। वो हिंदुस्तान लीवर नहीं, रिटर्नर हैं।

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