सुप्रीम कोर्ट ने अमिकस क्यूरी से कहा, महिला कैदियों और उनके बच्चों के पुनर्वास के लिए उठाए जाने वाले क़दमों के बारे में बताएं [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network

27 Feb 2018 4:09 PM GMT

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    सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह अमिकस क्यूरी एडवोकेट गौरव अग्रवाल से कहा कि वह महिला कैदी और उनके बच्चों के कल्याण और पुनर्वास के मामले की पड़ताल करें। इसके लिए एक कोर्ट ने 2013 में स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच कर रही है।

    न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, कुरियन जोसफ और दीपक गुप्ता की पीठ ने भारतीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निदेशक सुरिंदर राठी को जेल में जरूरत से ज्यादा लोगों के होने के मामले की जांच करें।

    राठी को जेल में रह रहे लोगों की कुल संख्या बताने को भी कहा गया है क्योंकि 31 दिसंबर 2017 तक की एक रिपोर्ट के अनुसार जेलों में सामान्य से 150% ज्यादा लोग रह रहे हैं। उन्हें राज्य की विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव के साथ मिलकर यह भी पता लगाने की कोशिश करने को कहा गया है कि देश भर के जेलों में कितने पद खाली हैं।

    कोर्ट ने जो स्वतः संज्ञान लिया उसका आधार था देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी का सुप्रीम कोर्ट को लिखा एक पत्र जिसमें उन्होंने देश के 1382 जेलों की बदतर हालत का जिक्र किया था।

    पीठ ने उसके बाद से कई आदेश जारी कर राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को फरवरी 2016 में जेलों में सुधार पर एक व्यापक दिशानिर्देश जारी किया।

    इसके बाद गत वर्ष सितम्बर में कोर्ट ने जेलों में हो रही मौतों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई और इसको रोकने के लिए कई आदेश जारी किए। इस बारे में उपलब्ध आंकड़ों को उद्धृत करते हुए कोर्ट ने पूरी जेल व्यवस्था में सुधार लाने पर जोर दिया।

    इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 मार्च को होनी है।


     
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