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अगर किसी वस्तु की विक्रय कीमत में कमी होती है तो असेसी इस पर कर रिफंड का हकदार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
25 Feb 2018 5:41 AM GMT
अगर किसी वस्तु की विक्रय कीमत में कमी होती है तो असेसी इस पर कर रिफंड का हकदार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर अस्थाई बिक्री पर बिक्री कर ज्यादा चुकाया गया है और अगर बाद में इसकी कीमत कम हो जाती है तो असेसी ज्यादा चुकाए गए कर की वापसी का हकदार है। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और मदन बी लोकुर की पीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट की अपील पर यह फैसला दिया।

अपीलकर्ता एलपीजी सिलिंडर का निर्माता है और सरकारी कंपनियों जैसे आईओसीएल, बीपीसीएल आदि को इसकी आपूर्ति करता है। एलपीजी सिलिंडर की कीमत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय निर्धारित करता है। कीमतों का निर्धारण बाद के समय के लिए होता है।

वर्ष 2000-2001 के लिए कीमत का निर्धारण लंबित था और अपीलकर्ता ने आईओसीएल को 682 रुपए प्रति सिलेंडर की अस्थाई दर पर इसकी आपूर्ति की। इस कीमत पर बिक्री कर अपीलकर्ता ने वसूल किया जो कि उसने बाद में विभाग को दे दिया। बाद में मंत्रालय ने 645 रुपए इसकी कीमत निर्धारित की जो कि उस कीमत से कम है जिस पर इसकी आपूर्ति की गई।

इसलिए, तेल कंपनी ने दोनों कीमतों में 37 रुपए प्रति सिलेंडर की कमी की वजह से बनने वाली अतिरिक्त राशि बिक्री कर सहित अपीलकर्ता को दी जाने वाली राशि से काट लिया। इसके बाद अपीलकर्ता ने विभाग से अतिरिक्त बिक्री कर लौटाने को कहा जो उसने चुकाया था। पर विभाग ने यह कहते हुए यह राशि वापस करने से इनकार कर दिया कि क़ानून में इस तरह का प्रावधान नहीं है। यह भी गौर किया गया कि इस आपूर्तिकर्ता और तेल कम्पनी के बीच करार निजी करार जैसा था और बिक्री कर विभाग का इससे कोई लेनादेना नहीं था। हाई कोर्ट ने भी अपीलकर्ता की अपील अनसुनी कर दी थी सो उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजस्थान बिक्री कर अधिनियम की धारा 2(39) में साफ लिखा है कि यह वो कीमत है जो कि डीलर को भुगतान किया गया है या किया जाता है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करती है कि डिस्काउंट या छूट जैसी किसी राशि को बिक्री मूल्य में जोड़ा नहीं जाएगा। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि करार में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित कीमत अस्थाई है जिसको मंत्रालय अंतिम रूप से निर्धारित करेगा। कोर्ट ने कहा कि कीमत का निर्धारण अपीलकर्ता के हाथ में नहीं है। इस बारे में आईएफबी उद्योग लिमिटेड बनाम केरल राज्य (2012) 4 SCC 618 मामले सहित अन्य मामलों का भी जिक्र किया गया कि डिस्काउंट या छूट की राशि काटने के बाद जो राशि असेसी को प्राप्त होती है सिर्फ उसी राशि को उसके कारोबार में शामिल किया जाएगा। इसलिए विभाग से कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने जो अतिरिक्त राशि चुकाई है उसका वह भुगतान करे।


 
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