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बच्चों में नशीले पदार्थों की लत : दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से जेजे अधिनियम की धारा 77 के तहत थिनर, ह्वाईटनर, करेक्टर्स को नशीले पदार्थ मानने को कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
23 Feb 2018 2:49 PM GMT
बच्चों में नशीले पदार्थों की लत : दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से जेजे अधिनियम की धारा 77 के तहत थिनर, ह्वाईटनर, करेक्टर्स को नशीले पदार्थ मानने को कहा [आर्डर पढ़े]
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दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सांघी और पीएस तेजी की पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि उसे 20 मार्च 2017 को जारी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 2015 की धारा 77 को लागू करना चाहिए। इसके तहत “नशीले द्रव” की व्यापक व्याख्या की गई है और इसमें व्हाइटनर, थिनर आदि को भी शामिल किया गया है।

“…बच्चे यह नहीं जानते होंगे कि वे जिसका उपभोग कर रहे हैं उससे कोई नुकसान भी है और यह भी कि वे पेय नहीं हैं, प्रथम दृष्टया हमारी राय यह है कि इस तरह की वस्तुओं को जेजे अधिनियम की धारा 77 के तहत नशीला पदार्थ माना जाए”।

कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा ने गत वर्ष जेजेबी द्वारा पास किए गए आदेश की ओर ध्यान दिलाया जिसमें जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए नशीले द्रव की व्यापक व्याख्या की गई।

 मेहरा ने कहा कि नशीले द्रव की व्याख्या को व्यापक करने की जरूरत है जिसमें न केवल परंपरागत द्रवों को शामिल किया जाए जिनका प्रयोग नशीले पेय के रूप में होता है बल्कि अन्य द्रवों को भी जो कि वैसे तो पेय नहीं हैं पर जो नशा पैदा करते हैं।

18 साल से कम उम्र के बच्चों को व्हाइटनर आदि बेची जाए

कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली सरकार ने 28 जुलाई 2017 को एक सूचना जारी कर कहा था कि करेक्शन फ्लुइड्स/थिनर और वल्केनाइज्ड सोल्यूशन को प्रयोग करने वाली वस्तुओं जैसे पेन आदि पर आवश्यक रूप से यह चेतावनी लिखा जाए कि इस रसायन के सूंघने या इसके उपभोग से स्वास्थ्य पर क्या असर होता है।

मेहरा ने कहा कि मुख्य सचिव से कहा गया कि वे इस बारे में एक निर्देश जारी करें कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को इनकी बिक्री तभी की जाए जब उनके अभिभावक उनके साथ हों।

नशीले पदार्थों के खतरे को कम करने और गुमशुदा नाबालिगों के लिए बहुद्देश्यीय रणनीति

पीठ ने यह बात तब कही जब कूड़ा बीनने वाली एक महिला आशा ने आठ और दस साल के अपने दो नाबालिग और गुमशुदा बच्चों का पता लगाने को कहा जो पश्चिमी दिल्ली के अमन विहार क्षेत्र से गायब हो गए।

कोर्ट को बताया गया कि अमन विहार क्षेत्र से भारी संख्या में गायब हो रहे बच्चों की समस्या को देखते हुए इसकी जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है।

पीठ ने कहा, “इस बारे में जो प्रयास किए गए हैं उसको दोगुना करने की जरूरत है। नाबालिग बच्चों का गुम हो जाना बहुत ही गंभीर है। चूंकि मानव तस्करी में शामिल कुछ संदिग्धों की पहचान की गई है, हम उम्मीद करते हैं कि एसआईटी इस बारे में और ज्यादा सघन अभियान चलाएगी और गुमशुदा बच्चों की तलाश कर पाएगी”।

इस बीच दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में मादक पदार्थों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए जो कदम उठाए हैं उसके बारे में कोर्ट में एक रिपोर्ट पेश की।

इस रिपोर्ट में मादक पदार्थों की आपूर्ति चेन पर नियंत्रण करने, इंस्पेक्टर दर्जे के अधिकारी के नेतृत्व में नारकोटिक स्क्वाड बनाने, मादक पदार्थों की बिक्री के लिए कुख्यात स्थानों, इसकी आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करने और समस्या को रोकने के लिए इस मामले में पहले से संलग्न रहे लोगों की धड़पकड़ करने की बात कही गई है। यह भी कहा गया कि  जेजे अधिनियम की धारा 77 के तहत इसके खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली सरकार द्वारा चिन्हित कुछ स्कूलों की निगरानी की बात भी कही गई ताकि इन स्थानों पर मादक द्रव्यों के सप्लायरों की पहचान की जा सके और इसके लिए जिला स्तर पर एक मुख्य अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।

पीठ ने कहा, “हम दिल्ली पुलिस को आदेश देते हैं कि वह कंप्लायंस रिपोर्ट में सुझाए गए कदम शीघ्र उठाए। हम उसे यह आदेश भी देते हैं कि वह इस बारे में स्थाई आदेश जारी करे”।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग को भी स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है जिसमें उनको दिल्ली में इस समय चल रहे कुल नशामुक्ति केन्द्रों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। उन्हें यह भी बताने को कहा गया है कि नाबालिग और वयस्कों के लिए और अधिक नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 7 मार्च को होगी।


 
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