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सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के लिए होने वाले चयन में भाग लेने की अनुमति दी [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
16 Feb 2018 3:26 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के लिए होने वाले चयन में भाग लेने की अनुमति दी [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने उन न्यायिक अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है जो दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के लिए होने वाले चयन में हिस्सा लेना चाहते हैं।

न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति मोहन एम शंतानागौदर की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि वे याचिकाकर्ताओं के आवेदनों को रजिस्टर करें और इस बारे में सात साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता को नजरअंदाज करें।

याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे थे, इसके लिए कौन योग्य हैं i) न्यायिक सेवाओं में हैं लेकिन जो नौकरी छोड़ने से पहले सात साल की सेवा पूरी कर चुके हैं;  या ii) वे जो एक वकील के रूप में अपनी प्रैक्टिस और न्यायिक सेवा में रहते हुए सात साल की अवधि पूरी कर चुके हैं;iii) या फिर न्यायिक सेवा में सात साल गुजारने वाले भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

पीठ ने कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह सिर्फ अस्थाई व्यवस्था है। सिर्फ इसमें शामिल होने का मतलब नहीं है कि बाद में वे समानता का दावा करने लगें। नियुक्ति की योग्यता के बारे में निर्णय मामले की अंतिम सुनवाई के समय होगा।”

बेंच ने यह भी कहा उसने एक बड़ी पीठ में भी इसी तरह की बात कही है। पीठ ने धीरज मोर बनाम दिल्ली हाई कोर्ट के मामले में इस बात पर गौर किया कि जिला जज के पद पर नियुक्ति की योग्यता के बारे में निर्णय सिर्फ नियुक्ति के समय देखी जानी है या फिर आवेदन देने के समय या दोनों ही समय।

इस मामले में कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि कुछ राज्यों द्वारा नियम बनाए जाए हैं जिनके अनुसार, “सात साल की गणना में एक न्यायिक कार्यालय में उनके (उम्मीदवार के) कार्यकाल को भी शामिल किया जाएगा।”


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