बिना वसीयत बनाए मरने वाले व्यक्ति का सौतेला बेटा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं कर सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network

7 Feb 2018 11:46 AM GMT

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  • बिना वसीयत बनाए मरने वाले व्यक्ति का सौतेला बेटा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं कर सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि एक ऐसा व्यक्ति जो कि बिना वसीयत बनाए मर गया हो उसका सौतेला बेटा उसकी संपत्ति का उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं कर सकता।

    न्यायमूर्ति एससी गुप्ते ने यह फैसला सुनाया ।

    मामले की पृष्ठभूमि

    इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी (नंबर 14) जो कि सहदायिकी का हिस्सा है और जिसका पैतृक संपत्ति में हिस्सा है, मर गया। हालांकि उसके वारिशों को सामने लाया गया पर 12 दिसंबर 2011 को एक आदेश द्वारा इस मामले को उन लोगों के खिलाफ खारिज कर दिया गया जिनको नोटिस नहीं जारी किया गया था। चूंकि दोनों ही प्रतिवादियों को मामले की सुनवाई के दौरान इससे जोड़ा गया इसलिए वे अनसर्व्ड ही रहे। इसलिए उनके खिलाफ मामला खारिज कर दिया गया।

    इसके बाद एक तीसरा पक्ष यांश बहादुर सभाजीत यादव ने प्रतिवादी नंबर 14 का सौतेला बेटा होने का दावा किया।

    अंतिम फैसला

    यह कहा गया कि आवेदक को एक पक्षकार के रूप में किसी अन्य उत्तराधिकारी की तरह ही शामिल किया जाना चाहिए। आवेदक ने संपत्ति में से अलग से हिस्सेदारी की मांग की और खुद को प्रतिवादी नंबर 14 का इस संपत्ति में जो 1/9वां हिस्सा था उसका उसने उत्तराधिकारी बताया। उसने यह भी मांग की कि विवादित संपत्ति के अधीन आने वाले  तीन भवनों पर जो काम चल रहा है उसे भी रोक दिया जाए।

    पर कोर्ट ने आवेदनकर्ता की दलील अस्वीकार कर दी और यह भी बताया कि उस परिसंपत्ति पर उसका दावा क्यों नहीं है।

    कोर्ट ने कहा, “यह दावा गलत है। पहली बात तो यह कि आवेदक को यह बताना होगा कि वह मृतक की परिसंपत्ति का वारिस है...यह गौर करना जरूरी है कि दावा एक ऐसे हिंदू की परिसंपत्ति पर किया गया है जो कि बिना वसीयत बनाए मर गया है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के वर्ग-I और वर्ग-II के तहत उत्ताराधिकारों की चर्चा की गई है। बेटे को वर्ग-I में शामिल किया गया है।” 

    कोर्ट ने कहा, “उस मृत व्यक्ति की पत्नी का बेटा उसका बेटा होने का दावा नहीं कर सकता क्योंकि वह इस महिला के पहले पति का बेटा है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में बेटे की परिभाषा में सौतेला बेटा नहीं आता...”

    इस तरह चैम्बर समन को खारिज कर दिया गया और आवेदक को 6 सप्ताह के अंदर 50 हजार रुपए जमा करने को कहा गया जो सभी प्रतिवादियों में बराबर बांटा जाएगा।


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