Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

जज लोया केस: वरिष्ठ वकील वी गिरी ने SC में सरकारी रिपोर्ट की विसंगतियां गिनाईं [लिखित सबमिशन पढ़ें]

LiveLaw News Network
5 Feb 2018 2:00 PM GMT
जज लोया केस: वरिष्ठ वकील वी गिरी ने SC में सरकारी रिपोर्ट की विसंगतियां गिनाईं [लिखित सबमिशन पढ़ें]
x

 तहसीन पूनावाला की ओर से वरिष्ठ वकील वी गिरी ने सोमावर को सीबीआई के विशेष जज बीएच लोया की मौत के मामले में कई विसंगतियों पर रोशनी डाली।

लोया की मौत की घटना की एक स्वतंत्र जांच के लिए याचिका पर  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच के सामने ये दलीलें दी गईं।  गिरी की लिखित प्रस्तुतियां जांच रिपोर्ट से सामने आए अभियोजन पक्ष के तथ्यों के संस्करण से शुरु हुईं।

 इसके बाद उन्होंने अभियोजन  के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों पर बिंदु-वार प्रकाश डाला और विविध विसंगतियां गिनाईं।

 उदाहरण के लिए जब यह कहा गया है कि न्यायाधीश लोया ने नागपुर में एक शादी में भाग लिया और वीआईपी अतिथि गृह में रुके तो शादी या गेस्ट हाउस में उनकी उपस्थिति स्थापित करने के लिए कोई जांच नहीं की गई।

 उन्होंने कहा , "नागपुर में रवि भवन में मृतक की उपस्थिति स्थापित करने के लिए  राज्य खुफिया विभाग को रवि भवन के अभिलेख, यानी प्रवेश / निकास रजिस्टर या किसी अन्य प्रासंगिक दस्तावेज को दाखिल करना चाहिए था ताकि यह पुष्टि हो सके कि मृतक रवि भवन के एक ही कमरे में 3 अन्य न्यायाधीशों के साथ ठहरे थे।

राज्य खुफिया विभाग को मृतक की मौजूदगी की पुष्टि के लिए रवि भवन के संबंधित कर्मचारियों के बयान को सत्यापित / दर्ज करना चाहिए था।

 इसके अलावा गिरी ने कहा कि इसमें शामिल डॉक्टरों से कोई वैरिफिकेशन नहीं की गई जबकि "मृतक के दाखिल होने की तारीख में विसंगतियां स्पष्ट हैं।”

इसलिए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "महाराष्ट्र राज्य द्वारा प्रस्तुत कहानी आत्मविश्वास पैदा नहीं करती और इस मामले की जांच की आवश्यकता है।"

 इसके अलावा  उन्होंने तर्क दिया कि न्यायाधीश लोया के शव को  लातूर को भेजने के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, जबकि अधिकारियों को पता था कि उनका परिवार मुंबई में रहता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर और एक न्यायाधीश के लिखित कथन में उल्लेख के बावजूद अभिलेखों से ईसीजी रिपोर्ट की अनुपस्थिति को भी बताया गया। इसके अलावा गिरि ने यह भी बताया कि जज लोया के साथ मौजूद न्यायधीशों के बयान दर्ज करने के बजाय राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) के आयुक्त संजय बर्वे  ने उन्हें पत्र भेजे। जवाब में अधिकारियों ने लिखित बयान भेजे थे जिनकी वैरिफिकेशन एसआईडी द्वारा नहीं की गई  है।

बर्वे द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को चुनौती देते हुए  गिरी ने प्रस्तुत किया, "सच्चाई / स्वतंत्रता का पता लगाने के लिए डीजी / आयुक्त द्वारा न्यायिक अधिकारियों के बयान दर्ज करना जरूरी था ताकि बयानों की जांच / सत्यापन हो सके। डीजी / कमिश्नर द्वारा कानून की सीमा के बाहर एक सामान्य  ढंग से जांच की गई है। "

 एसआईडी द्वारा प्रस्तुत "बुद्धिमान पूछताछ रिपोर्ट" की विश्वसनीयता को भी चुनौती दी गई, जिसमें यह तर्क दिया गया कि ऐसी रिपोर्ट पर विश्वास नहीं है क्योंकि यह 5 दिनों के भीतर "जल्दबाजी में" दाखिल की गई।

गिरी ने कहा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें घटनाओं के क्रम को सत्यापित किया गया है लेकिन ऐसा इसलिए नहीं था क्योंकि इस घटना के बारे में 16 स्वतंत्र व्यक्तियों की जांच नहीं हुई थी।

शुक्रवार को बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने ऐसी ही दलीलें दी थीं। दवे  ने  एसआईडी की “ विचारशील पूछताछ" और रिपोर्ट को   "विरोधाभासों का बंडल" होने का आरोप लगाया था।

 आप अदालत में दलीलों के आदान-प्रदान और लिखित सबमिशन पढ़ सकते हैं।


 
Next Story