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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ‘ जमानत के लिए आधार’ के आदेश में संशोधन किया : अब आधार अनिवार्य नहीं [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
3 Feb 2018 5:55 AM GMT
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ‘ जमानत के लिए आधार’ के आदेश में संशोधन किया : अब आधार अनिवार्य नहीं [आर्डर पढ़े]
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने उस आदेश में संशोधन कर दिया है जिसमें जमानत के लिए आरोपी और जमानती के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाया गया था।

अब ज़मानत के लिए मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड या पासपोर्ट जैसे पहचान के किसी दस्तावेज़ को भी जमा किया जा सकता है।

जस्टिस  प्रशांत कुमार मिश्रा ने गुरुवार को आदेश में कहा कि वह वकीलों की उन दलीलों व सबूतों से सहमत हैं जिन्होंने कहा है कि आधार की वैधता का मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा विचाराधीन है और ऐसे में जमानत के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने जिला बार एसोसिएशन के लिए उपस्थित वकील के साथ सहमति जताई कि आधार कार्ड अनिवार्य नहीं किया जा सकता और अभियुक्त या जमानती  की पहचान उनके पासपोर्ट, पैन कार्ड आदि की पहचान के अन्य प्रमाण प्राप्त करके की जा सकती है।

अदालत ने इसके बाद जारी दिशानिर्देशों में संशोधन किया: ज़मानत के कागजात की जांच करते समय, परीक्षण अदालत अनिवार्य रूप से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड या पासपोर्ट की पहचान के दस्तावेज प्राप्त करेगी।

 ज़मानत के लिए इस आदेश में डिप्टी एडवोकेट जनरल के उन बयानों के बावजूद संशोधन किया गया जिसमें कहा गया कि बिलासपुर की केंद्रीय जेल में बंद 3,200 कैदियों में से 2,481 कैदियों के आधार कार्ड पहले ही तैयार किए जा चुके हैं और आधार कार्ड बनाने के लिए नियमित रूप से कम अंतराल पर राज्य की सभी जेलों में शिविर लगाए जाते हैं। इसलिए राज्य की ओर से आधार कार्ड तैयार करने में  कोई कठिनाई नहीं है।

दरअसल  लाइव लॉ ने हाईकोर्ट के पहले आदेश की प्रकाशित किया था जिसमें जमानत के लिए आधार को अनिवार्य बनाया गया था। इसमें जज ने कहा था :  "इसमें कोई संदेह नहीं है, उपरोक्त द्वारा देखते हुए और कुछ अन्य इसी तरह वैध विचार हो सकते हैं, ये सरकार की मंशा है कि आधार आंदोलन में तेजी आए और इस देश के लोगों को आधार योजना के तहत खुद को नामांकित करने के लिए  प्रोत्साहित किया जाए।”

 बाद में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस आदेश को चुनौती देने वाली वकील पीयूष भाटिया की याचिका का निपटारा कर दिया था जब छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के वकील ने कहा कि इस संबंध में हाईकोर्ट में आदेश में संशोधन करने के लिए अर्जी दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को आदेश में संशोधन के लिए 10 दिन में फैसला लेने को कहा था।


 
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