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उड़ीसा हाईकोर्ट के मौजूदा दो जजों के खिलाफ इन- हाउस समिति ने जांच फिर से शुरू की

LiveLaw News Network
1 Feb 2018 9:25 AM GMT
उड़ीसा हाईकोर्ट के मौजूदा दो जजों के खिलाफ इन- हाउस समिति ने जांच फिर से शुरू की
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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसजे वजीफदार की  अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय इन हाउस समिति उडीसा उच्च न्यायालय के दो वर्तमान जजों जस्टिस इंद्रजीत मोहंती और जस्टिस संगम कुमार साहू के खिलाफ लगाए गए  पद  के दुरुपयोग के आरोपों की जांच शुरू करने जा रही है।

समिति में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम.जोसफ और सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। एक पत्र में  जस्टिस वजीफदार ने शिकायतकर्ता आरटीआई कार्यकर्ता जयंत कुमार दास को सूचित किया है कि समिति की अगली बैठक 1 और 2 फरवरी को सुबह 11 बजे होगी।

वर्तमान में ओडिसा की पुरी जिला जेल में बंद दास  ने इस महीने के शुरूआती दिनों में पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन भेजा था कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से  या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समिति की बैठकों में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

 एक अन्य पत्र में उन्होंने उड़ीसा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से अनुरोध किया था कि वह ओडिसा पुलिस को निर्देश दें कि जेल परिसर से बाहर ले जाने के दौरान उसे हथकड़ी ना लगाई जाए।

 जस्टिस वजीफदार के पत्र में समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए "आवश्यक कदम उठाने" के लिए कहा गया है।

 अब तक क्या हुआ

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने दास  और डॉ आदित्य प्रसाद मिश्रा द्वारा दायर शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए आरोपों की जांच के लिए इन-हाउस कमेटी का गठन किया था।

उड़ीसा उच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठ जज जस्टिस मोहंती पर आरोप लगाया गया है कि बेंच से हाईकोर्ट जज बनाने के बाद उन्हें होटल का कारोबार चलाने के लिए बैंक ऋण प्राप्त हुआ था।

शिकायत के अनुसार वह कटक के एक व्यस्त बाजार में 'ट्रिपल सी' नामक होटल चलाते है। 2009 में उन्होंने कथित रूप से  होटल चलाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 2.5 करोड़ का लोन लिया जो न्यायाधीशों के लिए नैतिकता के कोड का उल्लंघन है।

जुलाई 2014 में उच्च न्यायालय के जज के रूप में नियुक्त किए गए जस्टिस संगम साहू के खिलाफ शिकायत है कि अतिरिक्त जज के तौर पर उन्होंने सरकारी आवास के नवीनीकरण के लिए सार्वजनिक निधियों का दुरुपयोग करते हुए अपने अधिकारों से बाहर जाकर बंगले में काम कराया।

जांच के दौरान एक वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट जज का नाम आने के बाद अचानक इसे रोक दिया गया था। कार्रवाई में रुकावट आने पर  समिति ने उसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायधीश जस्टिस खेहर से मार्गदर्शन के लिए पत्र लिखा। यह दावा किया था कि आरोपों के बावजूद समिति आगे बढ़ने में असमर्थ है क्योंकि इसके जनादेश में सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज के खिलाफ जांच के आरोपों को शामिल नहीं किया गया था।

 हालांकि जस्टिस  खेहर ने हालांकि समिति के प्रतिनिधित्व पर कोई कदम नहीं उठाया था। इसी कारण दास ने  पिछले साल अक्टूबर में समिति को एक और पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की थी।

 उन्होंने लिखा था, "मुझे लगता है कि जैसा कि भारतीय न्यायपालिका न्यायमूर्ति इंद्रजीत मोहंती के अवैध कृत्य को कम करने की कोशिश कर रही है,  उनके खिलाफ किसी भी अनुशासनिक कार्रवाई के मूड में नहीं है। अगर भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय और इन-हाउस कमिटी का ये रवैया होगा तो भारत के नागरिक निश्चित रूप से भारतीय न्यायपालिका में अपना विश्वास छोड़ देंगे।”

उन्होंने तब मांग की थी कि उन्हें समिति द्वारा की गई प्रगति पर जानकारी दी जाए  और उन्होंने अनुरोध किया कि जांच काशीघ्रता से निपटारा हो।

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